रामगढ़, झारखंड : राज्य के विभिन्न जिला न्यायालयों में कार्यरत सरकारी अधिवक्ताओं के लिए आधारभूत संरचना, मानव संसाधन एवं आधुनिक डिजिटल सुविधाओं की गंभीर कमी को लेकर रामगढ़ सिविल कोर्ट के सरकारी अधिवक्ता संजीव कुमार अम्बष्ठ ने झारखंड के मुख्यमंत्री को एक विस्तृत प्रस्ताव भेजकर राज्यव्यापी पहल की मांग की है।
अपने प्रस्ताव में श्री अम्बष्ठ ने कहा है कि सरकारी अधिवक्ता राज्य सरकार के प्रमुख विधिक प्रतिनिधि होते हैं और जिला न्यायालयों में राज्य सरकार के मुकदमों के प्रभावी संचालन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसके बावजूद झारखंड के अधिकांश जिलों में सरकारी अधिवक्ताओं के लिए न तो समुचित कार्यालय भवन उपलब्ध हैं और न ही आधुनिक न्यायिक व्यवस्था के अनुरूप आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं।
उन्होंने बताया कि कई जिलों में अतिरिक्त सरकारी अधिवक्ताओं की नियुक्ति तो की गई है, लेकिन उनके बैठने तक की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। अधिकांश कार्यालयों में कंप्यूटर, प्रिंटर, स्कैनर, इंटरनेट, डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन, अभिलेखागार, कार्यालय सहायक, रिकॉर्ड कीपर, डेटा एंट्री ऑपरेटर तथा चपरासी जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है।
श्री अम्बष्ठ ने कहा कि वर्तमान समय में जिला न्यायालय, ई-कोर्ट प्रणाली, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, ई-फाइलिंग एवं डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन जैसी आधुनिक तकनीकों को अपना चुके हैं, किंतु सरकारी अधिवक्ताओं के कार्यालय इन सुविधाओं से काफी हद तक वंचित हैं। इससे सरकारी मुकदमों के प्रभावी संचालन एवं त्वरित न्यायिक प्रक्रिया पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
मुख्यमंत्री को भेजे गए प्रस्ताव में निम्न प्रमुख मांगें रखी गई हैं—
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जिला न्यायालय परिसर अथवा उसके निकट सरकारी अधिवक्ता कार्यालय हेतु पृथक भवन या ब्लॉक का निर्माण।
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सरकारी अधिवक्ता एवं अतिरिक्त सरकारी अधिवक्ताओं के लिए स्वतंत्र चेम्बर की व्यवस्था।
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प्रत्येक कार्यालय में लिपिक, रिकॉर्ड कीपर, डेटा एंट्री ऑपरेटर एवं चपरासी की स्वीकृत नियुक्ति।
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कंप्यूटर, स्कैनर, प्रिंटर, हाई-स्पीड इंटरनेट एवं ई-ऑफिस प्रणाली की उपलब्धता।
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राज्य सरकार के मुकदमों के लिए केंद्रीकृत डिजिटल केस मैनेजमेंट सिस्टम की स्थापना।
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अभिलेखों के सुरक्षित संरक्षण एवं डिजिटलीकरण की व्यवस्था।
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कार्यालय संचालन एवं रख-रखाव हेतु पृथक बजटीय प्रावधान।
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अधिकारियों एवं वादकारियों के साथ समन्वय के लिए बैठक एवं परामर्श कक्ष की व्यवस्था।