सांसों की शक्ति से जीवन की ऊर्जा तक : योग के दिव्य स्पंदन से गूँज उठा श्री कृष्ण विद्या मंदिर

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रामगढ़ कैंट, झारखंड : योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित करने वाली एक अद्भुत जीवन पद्धति है। इसी संदेश के साथ रविवार को श्री कृष्ण विद्या मंदिर में 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का भव्य एवं प्रेरणादायी आयोजन किया गया। इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की थीम “योग फॉर हेल्दी एजिंग” रखी गई है, जो यह संदेश देती है कि योग किसी विशेष आयु वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन के प्रत्येक पड़ाव को स्वस्थ, सक्रिय, आनंदमय और ऊर्जावान बनाए रखने की क्षमता रखता है।

विद्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम में विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष आनंद अग्रवाल (अधिवक्ता), प्राचार्या गुरप्रीत कौर, उपप्राचार्य विजय तिवारी, शारीरिक शिक्षक मनोरंजन चौधरी तथा प्रशासक एसपी सिन्हा की गरिमामयी उपस्थिति रही। सभी अतिथियों का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया।

कार्यक्रम के प्रारंभ में विज्ञान विभाग की शिक्षिका रंजू कुमारी ने योग के महत्व एवं उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि योग जीवन को व्यवस्थित, अनुशासित और संतुलित बनाने की संपूर्ण प्रक्रिया है।

इस विशेष अवसर पर खेलगांव, रांची से आमंत्रित योग प्रशिक्षक शुभम वर्मा ने अपने कुशल मार्गदर्शन से कार्यक्रम को और अधिक प्रभावशाली बनाया। उनके निर्देशन में योगाभ्यास की शुरुआत सामूहिक ‘ॐ’ उच्चारण के साथ हुई, जिसने पूरे वातावरण को शांति, ऊर्जा और आध्यात्मिक अनुभूति से भर दिया।

योग प्रशिक्षक ने विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं उपस्थित अतिथियों को विभिन्न योगासन एवं प्राणायाम का अभ्यास कराया तथा उनके स्वास्थ्य लाभों की विस्तृत जानकारी दी। सर्वप्रथम सूर्य नमस्कार कराया गया। इसके बाद रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाने के लिए ताड़ासन, मानसिक संतुलन के लिए वृक्षासन तथा पीठ की मांसपेशियों को सशक्त एवं लचीला बनाने के लिए भुजंगासन का अभ्यास कराया गया। साथ ही वज्रासन, पद्मासन, कपालभाति एवं अनुलोम-विलोम का भी अभ्यास कराया गया।

इस अवसर पर अध्यक्ष आनंद अग्रवाल ने अपने संबोधन में कहा कि योग भारत की प्राचीन संस्कृति का अमूल्य उपहार है, जिसने पूरे विश्व को स्वस्थ जीवन जीने की दिशा दिखाई है। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान प्रतिस्पर्धात्मक युग में सफलता के लिए मानसिक एकाग्रता और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों आवश्यक हैं। जिस प्रकार मजबूत नींव पर ही एक सुंदर भवन का निर्माण होता है, उसी प्रकार स्वस्थ शरीर और शांत मन पर ही सफल जीवन की नींव रखी जाती है।

उन्होंने सभी विद्यार्थियों और शिक्षकों से योग को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाने तथा स्वस्थ, अनुशासित और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम स्वस्थ जीवन, आत्म-अनुशासन और सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में विद्यालय का एक सार्थक प्रयास साबित हुआ। इस आयोजन ने विद्यार्थियों के भीतर नियमित दिनचर्या, आत्म-नियंत्रण एवं स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूकता विकसित की, जो उनके सर्वांगीण विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। कार्यक्रम में विद्यालय के सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।