श्री कृष्ण विद्या मंदिर में काव्य और संगीत प्रतिभाओं का संगम, सह-पाठ्यचर्या प्रतियोगिताओं में छात्रों ने बिखेरा हुनर

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रामगढ़ कैंट  (झारखंड) : श्री कृष्ण विद्या मंदिर में शुक्रवार को सह-पाठ्यचर्या गतिविधियों (सीसीए) के अंतर्गत साहित्यिक एवं सांगीतिक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। पूरे दिन विद्यालय परिसर कविता, संगीत और रचनात्मक प्रस्तुतियों से सराबोर रहा। विभिन्न कक्षाओं के विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा का प्रभावशाली प्रदर्शन कर शिक्षकों और अभिभावकों की खूब सराहना बटोरी।

कार्यक्रम की शुरुआत नर्सरी से कक्षा तृतीय तक के विद्यार्थियों की अंग्रेजी कविता पाठ प्रतियोगिता से हुई। नन्हे विद्यार्थियों ने स्पष्ट उच्चारण, आत्मविश्वास और आकर्षक मंचीय प्रस्तुति के साथ अपनी कविताएं प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया।

इसके बाद कक्षा चतुर्थ एवं पंचम के विद्यार्थियों के बीच हिंदी कविता पाठ प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रतिभागियों ने राष्ट्रप्रेम, प्रकृति, मानवीय मूल्यों और सामाजिक संवेदनाओं पर आधारित कविताओं का भावपूर्ण वाचन कर अपनी अभिव्यक्ति क्षमता का परिचय दिया।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण कक्षा षष्ठम से नवम एवं एकादश के विद्यार्थियों के बीच आयोजित अंतर-सदनीय समूहगान प्रतियोगिता रही। विभिन्न सदनों के आठ से दस सदस्यीय समूहों ने देशभक्ति, प्रेरणा और सांस्कृतिक चेतना से ओत-प्रोत गीतों की प्रस्तुति देकर वातावरण को संगीतमय बना दिया। सुर, ताल, लय और सामूहिक समन्वय की उत्कृष्ट प्रस्तुति के आधार पर सुभाष सदन ने प्रथम स्थान प्राप्त कर प्रतियोगिता का खिताब अपने नाम किया।

इस अवसर पर विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष आनंद अग्रवाल (अधिवक्ता) ने सभी प्रतिभागियों को बधाई देते हुए कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल पाठ्य पुस्तकों तक सीमित नहीं है, बल्कि कला, साहित्य और संस्कृति के माध्यम से व्यक्तित्व का समग्र विकास भी उतना ही आवश्यक है।

कार्यक्रम के समापन पर विद्यालय की प्राचार्या गुरप्रीत कौर ने विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान किए तथा सभी छात्रों की सराहना करते हुए उन्हें भविष्य में भी इसी उत्साह के साथ विभिन्न गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रेरित किया।

विद्यालय प्रबंधन के अनुसार इस आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों में रचनात्मक सोच, साहित्यिक अभिरुचि, सांगीतिक प्रतिभा, आत्मविश्वास और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना को प्रोत्साहित करना था, जिसमें विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ अपनी भागीदारी निभाई।