रांची (झारखंड) : झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को बड़ी सफलता मिली है। राज्य सरकार की पुनर्वास नीति और पुलिस के ‘नई दिशा-नई पहल’ अभियान से प्रभावित होकर विभिन्न प्रतिबंधित माओवादी संगठनों से जुड़े 16 उग्रवादियों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। आत्मसमर्पण करने वालों में संगठन का एक रीजनल कमांडर, तीन जोनल कमांडर, तीन सब-जोनल कमांडर, छह एरिया कमांडर तथा तीन कैडर सदस्य शामिल हैं।
आत्मसमर्पण कार्यक्रम के दौरान सभी उग्रवादियों ने अपने पास मौजूद 11 आधुनिक हथियार, 38 मैगजीन और 1,562 कारतूस सुरक्षा बलों को सौंप दिए। पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह हाल के महीनों में राज्य में नक्सल विरोधी अभियान की सबसे महत्वपूर्ण सफलताओं में से एक है।
राज्य की पुलिस महानिदेशक तदाशा मिश्रा ने आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों का स्वागत करते हुए कहा कि राज्य सरकार की पुनर्वास नीति का उद्देश्य मुख्यधारा से भटके लोगों को समाज की मुख्यधारा में वापस लाना है। उन्होंने विश्वास जताया कि आत्मसमर्पण करने वाले सभी लोगों को सरकार की पुनर्वास योजनाओं का लाभ मिलेगा और वे सामान्य जीवन की ओर लौटेंगे।
पश्चिमी झारखंड में सबसे अधिक असर
पुलिस के अनुसार आत्मसमर्पण करने वाले 16 उग्रवादियों में 14 पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा क्षेत्र) से जुड़े हैं, जबकि 2 लातेहार क्षेत्र से हैं। अधिकारियों का दावा है कि लगातार चल रहे अभियानों और आत्मसमर्पण नीति के कारण राज्य में सक्रिय नक्सलियों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है। विशेष रूप से चाईबासा क्षेत्र में संगठन की सक्रियता पहले की तुलना में काफी कमजोर हुई है।
कई इनामी उग्रवादी भी शामिल
आत्मसमर्पण करने वालों में कई ऐसे उग्रवादी भी हैं, जिन पर लाखों रुपये का इनाम घोषित था। इनमें संगठन का रीजनल कमांडर संतोष उरांव उर्फ बासुदेव दा (₹15 लाख इनामी), चंदन लोहरा (₹10 लाख इनामी), अनिल तुरी और सुखलाल बिरंजिया (दोनों ₹5 लाख इनामी) सहित अन्य सक्रिय सदस्य शामिल हैं। इन पर हत्या, विस्फोट, पुलिस बलों पर हमला, लेवी वसूली और अन्य नक्सली गतिविधियों से जुड़े अनेक मामले दर्ज रहे हैं।
आधुनिक हथियार किए गए जमा
आत्मसमर्पण के दौरान सुरक्षा बलों को सौंपे गए हथियारों में AK-47, M-16, INSAS राइफल, HK-33 राइफल, यूएस कार्बाइन सहित अन्य आधुनिक हथियार शामिल हैं। इनके साथ बड़ी मात्रा में मैगजीन और कारतूस भी जमा कराए गए।
पुनर्वास नीति पर सरकार का जोर
झारखंड पुलिस का कहना है कि अभियान का उद्देश्य केवल उग्रवाद के खिलाफ कार्रवाई करना नहीं, बल्कि भटके हुए युवाओं को हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन अपनाने के लिए प्रेरित करना भी है। इसी रणनीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों को राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के अनुरूप सहायता, प्रशिक्षण और पुनर्वास का लाभ उपलब्ध कराया जाएगा।
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा अभियान आगे भी जारी रहेगा और विकास योजनाओं के साथ-साथ पुनर्वास नीति को भी प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा, ताकि राज्य में स्थायी शांति और विकास का वातावरण स्थापित किया जा सके।