रामगढ़ कैंट, झारखंड : रामगढ़ जिले की औद्योगिक इकाइयों में लगातार हो रही दुर्घटनाओं और श्रमिकों की मौत को लेकर अब राजनीतिक स्तर पर भी सवाल उठने लगे हैं। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव शांतनु मिश्रा ने उपायुक्त रामगढ़ को पत्र सौंपकर जिले में हाल के वर्षों में हुई औद्योगिक दुर्घटनाओं की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने सभी प्रमुख औद्योगिक प्रतिष्ठानों का विशेष सुरक्षा ऑडिट कराने और लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उपायुक्त को पत्र सौंपने के क्रम में शांतनु मिश्रा के साथ कांग्रेस के जिला प्रवक्ता मुकेश यादव, विधायक प्रतिनिधि संजय साव व कांग्रेस के परिष्ठ नेता उपेंद्र वर्मा थे ।
शांतनु मिश्रा ने अपने पत्र में कहा है कि रामगढ़ कोयला, इस्पात, स्पंज आयरन, सीमेंट और पावर प्लांट सहित विभिन्न औद्योगिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र है। ऐसे में इन इकाइयों में काम करने वाले श्रमिकों और कर्मचारियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
लगातार हादसों ने खड़े किए सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
पत्र में जिले की विभिन्न औद्योगिक इकाइयों में पिछले कुछ समय से सामने आई दुर्घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि कई हादसों में श्रमिकों और कर्मचारियों की मौत हुई है, जबकि अनेक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इससे यह सवाल उठता है कि क्या संबंधित औद्योगिक प्रतिष्ठानों में निर्धारित सुरक्षा मानकों, श्रम कानूनों और सुरक्षा प्रोटोकॉल का सही तरीके से पालन किया जा रहा है। हो रही लगातार दुर्घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि किसी औद्योगिक दुर्घटना को महज तकनीकी या सामान्य हादसा मानकर कार्रवाई समाप्त कर देना पर्याप्त नहीं है। दुर्घटना के पीछे प्रबंधन की लापरवाही, सुरक्षा उपकरणों की कमी, प्रशिक्षण का अभाव या सुरक्षा नियमों के उल्लंघन जैसे पहलुओं की भी जांच जरूरी है।
स्पंज आयरन और सीमेंट कारखाने में हादसे का भी जिक्र
कांग्रेस महासचिव ने शुक्रवार 21 अगस्त 2026 को बरकाकाना हेहल स्थित मां छिन्नमस्तिका स्पंज एवं सीमेंट प्राइवेट लिमिटेड की औद्योगिक दुर्घटना का भी उल्लेख किया है। पत्र के अनुसार, इस हादसे में तीन अभियंताओं की मौत हुई, जबकि एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुआ।
उन्होंने लगातार हो रही ऐसी घटनाओं को गंभीर चिंता का विषय बताते हुए औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की मांग की है।
डीसी से 10 बिंदुओं पर जांच की मांग
शांतनु मिश्रा ने उपायुक्त से मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर कार्रवाई की मांग की है—
पिछले कुछ वर्षों में रामगढ़ की औद्योगिक इकाइयों में हुई प्रमुख दुर्घटनाओं और मौतों की सूची तैयार की जाए।
प्रत्येक दुर्घटना के कारणों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच हो।
यह पता लगाया जाए कि हादसा तकनीकी कारण, सुरक्षा नियमों के उल्लंघन या मानवीय लापरवाही से हुआ।
श्रमिकों को उपलब्ध कराए जाने वाले हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट, सुरक्षा जूते, दस्ताने, मास्क और फायर सेफ्टी उपकरणों की जांच हो।
संबंधित इकाइयों में नियमित सुरक्षा निरीक्षण और सेफ्टी ऑडिट की स्थिति की समीक्षा की जाए।
श्रमिकों को सुरक्षा एवं आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने का प्रशिक्षण दिए जाने की जांच हो।
श्रम विभाग, फैक्ट्री इंस्पेक्टर और अन्य संबंधित विभागों के पूर्व निरीक्षण एवं निर्देशों की समीक्षा की जाए।
मृत और घायल श्रमिकों को मुआवजा, बीमा एवं अन्य वैधानिक लाभ मिले या नहीं, इसकी जांच हो।
प्रबंधन, अधिकारी या ठेकेदार की लापरवाही सामने आने पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
जिले की प्रमुख औद्योगिक इकाइयों का विशेष सुरक्षा ऑडिट कराकर उसकी रिपोर्ट और कार्रवाई से संबंधित जानकारी सार्वजनिक की जाए।
“औद्योगिक विकास तभी सार्थक, जब श्रमिक भी सुरक्षित रहें”
शांतनु मिश्रा ने कहा कि औद्योगिक विकास तभी सार्थक माना जा सकता है, जब उसके साथ श्रमिकों का जीवन और सुरक्षा भी सुनिश्चित हो। किसी परिवार के कमाने वाले सदस्य की औद्योगिक दुर्घटना में मौत केवल एक हादसा नहीं, बल्कि पूरे परिवार के लिए गंभीर सामाजिक त्रासदी होती है।
उन्होंने उपायुक्त से मामले में तत्काल संज्ञान लेकर उच्चस्तरीय जांच समिति गठित करने, समयबद्ध जांच कराने और दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों या प्रतिष्ठानों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।