पायलट प्रोजेक्ट के तहत इको पार्क, मत्स्य पालन और सोलर प्रोजेक्ट विकसित करने पर विचार
कुजू (रामगढ़), झारखंड :सीसीएल की करमा परियोजना में खनन कार्य समाप्त होने के बाद क्षेत्र की भूमि के बेहतर उपयोग और स्थानीय स्तर पर वैकल्पिक रोजगार एवं आर्थिक उपार्जन के अवसर विकसित करने की संभावनाओं को लेकर जर्मनी की GIZ संस्था, झारखंड सरकार एवं अन्य संबंधित अधिकारियों की टीम ने परियोजना क्षेत्र का निरीक्षण किया।
फिलिप जॉनसन के नेतृत्व में जर्मनी की संस्था के अधिकारियों की टीम सीसीएल करमा परियोजना पहुंची। यहां सीसीएल कुजू क्षेत्र के महाप्रबंधक राजीव कुमार सिन्हा एवं करमा परियोजना पदाधिकारी रामेश्वर मुंडा की अगुवाई में अधिकारियों का स्वागत किया गया।
निरीक्षण के दौरान बताया गया कि भारत और जर्मनी सरकार के संयुक्त प्रयास से पायलट प्रोजेक्ट के तहत माइंस क्लोजर के बाद खनन क्षेत्र की भूमि के सदुपयोग की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। इसी क्रम में करमा परियोजना क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति, वर्तमान खनन गतिविधियों एवं अन्य परिस्थितियों का जायजा लिया गया।
इको पार्क, मछली पालन और सोलर प्रोजेक्ट की संभावनाएं
अधिकारियों ने खनन कार्य बंद होने के बाद खाली होने वाली भूमि पर इको पार्क, मत्स्य पालन एवं सोलर प्रोजेक्ट विकसित करने की संभावनाओं पर चर्चा की। इसका उद्देश्य खनन के बाद भूमि का दुरुपयोग रोकने के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए वैकल्पिक रोजगार एवं आय के अवसर उपलब्ध कराना है।
जर्मनी के अधिकारियों के अनुसार यूरोपीय संघ (European Union) की फंडिंग से संचालित होने वाले इस पायलट प्रोजेक्ट में सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण एवं स्वच्छता समेत अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
अधिकारियों ने कहा कि माइंस क्लोजर के बाद क्षेत्र में अनधिकृत कब्जे एवं अवांछित गतिविधियों को रोकना तथा ऐसी व्यवस्था विकसित करना जरूरी है, जिससे भविष्य में सरकार और कोल इंडिया प्रबंधन पर अतिरिक्त भार न पड़े। इसी दिशा में संभावित वैकल्पिक उपयोगों की योजना तैयार करने के उद्देश्य से यह निरीक्षण किया गया।
जर्मनी और सीसीएल अधिकारियों ने किया पौधरोपण
निरीक्षण के बाद जर्मनी की संस्था एवं सीसीएल के अधिकारियों ने परियोजना क्षेत्र में पौधरोपण भी किया। पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्र के विकास के संदेश के साथ अधिकारियों ने पौधे लगाए।
वहीं, सीसीएल कुजू क्षेत्र की सीएसआर योजना के तहत आसपास के ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को स्वरोजगार के लिए सिलाई मशीनें भी उपलब्ध कराई गईं। इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाना है।
मौके पर डीके सोलंकी, आरपी दास, रणविजय सिंह, एसके भावरिया, अभिनव जैन, ऋषि किशोर, शरत सिंह, संजीव कुमार एवं निशंक अभिषेक सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मी मौजूद रहे।