10 हजार बोतल एक्सपायर्ड कोल्ड ड्रिंक मिलने पर पूर्वविधायक शंकर चौधरी का खाद्य सुरक्षा विभाग पर हमला, बोले- ‘एक जिले में कार्रवाई के दो अलग-अलग नियम क्यों?’

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 फैमिली मार्ट में बड़ी मात्रा में एक्सपायर्ड एक्सपायर्ड ड्रिंक मिलने के बाद विभाग की कार्रवाई पर उठाए सवाल, उपायुक्त को पत्र देकर जांच और कार्रवाई की मांग

रामगढ़ कैंट, झारखंड : रामगढ़ के पूर्व विधायक शंकर चौधरी ने खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अपने आवासीय कार्यालय में आयोजित पत्रकार सम्मेलन में उन्होंने उपायुक्त को दिए गए आवेदन की जानकारी साझा करते हुए विभाग की कार्यशैली पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच और कार्रवाई सही है तो संबंधित अधिकारियों का उत्साह बढ़ाया जाना चाहिए, लेकिन यदि कार्रवाई में किसी प्रकार की अनियमितता या पक्षपात सामने आता है तो दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

पूर्व विधायक ने बताया कि 4 सितंबर 2026 के समाचारों में रामगढ़ शहर में खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा जांच अभियान शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई थी। इसी अभियान के दौरान नईसराय स्थित ‘फैमिली मार्ट’ में करीब 10 हजार बोतल एक्सपायर्ड कोल्ड ड्रिंक मिलने की बात सामने आई। उनके अनुसार, खाद्य सुरक्षा टीम ने निरीक्षण के दौरान इतनी बड़ी मात्रा में एक्सपायर्ड पेय पदार्थ का स्टॉक देखकर आश्चर्य व्यक्त किया और जांच में सभी बोतलों के एक्सपायर्ड होने की बात सामने आई।

‘10 हजार बोतल एक्सपायर्ड मिलीं, फिर सात दिन की मोहलत क्यों?’

शंकर चौधरी ने सबसे बड़ा सवाल विभाग की आगे की कार्रवाई को लेकर उठाया। उन्होंने कहा कि संबंधित दुकानदार को उत्पाद वापस लेने अथवा नियमानुसार नष्ट करने के लिए सात दिनों का समय दिया गया है।

पूर्व विधायक ने सवाल किया कि जब इतनी बड़ी मात्रा में एक्सपायर्ड खाद्य-पेय सामग्री बरामद हुई है तो उसे तत्काल नियमानुसार नष्ट करने या प्रभावी कानूनी कार्रवाई करने के बजाय दुकानदार को सात दिनों का समय क्यों दिया गया?

उन्होंने कहा कि आम जनता के स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में कार्रवाई के मानक सभी के लिए समान होने चाहिए।

‘दिवाली में नकली खोवा-पनीर मिलने पर तत्काल नष्ट, यहां सात दिन का समय क्यों?’

पूर्व विधायक ने खाद्य सुरक्षा विभाग की कथित दोहरी कार्रवाई पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि दीपावली के दौरान इसी विभाग की ओर से होटलों और प्रतिष्ठानों की जांच की जाती है। नकली खोवा या नकली पनीर मिलने पर सामग्री को मौके पर ही नष्ट किए जाने तथा संबंधित होटल संचालक पर जुर्माना लगाने की कार्रवाई की जाती है।

ऐसे में उनका सवाल है कि एक ही जिले में खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई के अलग-अलग मानक क्यों दिखाई दे रहे हैं?

उन्होंने उपायुक्त से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

‘जांच सही है तो अधिकारियों का मनोबल बढ़ाएं, गलत है तो कठोर कार्रवाई करें’

शंकर चौधरी ने उपायुक्त से स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि जांच टीम की कार्रवाई नियमानुसार और सही पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, ताकि अन्य विभागों के पदाधिकारियों का भी मनोबल ऊंचा हो।

वहीं, यदि जांच या कार्रवाई में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो दोषी अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई अधिकारी रिश्वत या किसी अन्य प्रभाव के बल पर कानून की धज्जियां न उड़ा सके।

पूर्व विधायक ने कहा कि खाद्य सुरक्षा जैसे संवेदनशील विभाग की जिम्मेदारी सीधे आम लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ी है। ऐसे में किसी भी स्तर पर लापरवाही, पक्षपात या नियमों की अनदेखी गंभीर विषय है।

उपायुक्त को आवेदन देकर मांगी कार्रवाई की जानकारी

पूर्व विधायक ने अपने आवेदन में उपायुक्त से पूरे मामले पर संज्ञान लेते हुए आवश्यक कार्रवाई करने तथा उन्हें भी निर्णय से अवगत कराने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि जनता के स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और समान कार्रवाई बेहद जरूरी है।

अब देखना यह होगा कि 10 हजार बोतल एक्सपायर्ड कोल्ड ड्रिंक से जुड़े इस मामले में जिला प्रशासन खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई की समीक्षा करता है या नहीं, और पूर्व विधायक द्वारा उठाए गए सवालों पर प्रशासन की ओर से क्या जवाब सामने आता है।