पंजाबी हिंदू बिरादरी ने किया आयोजन, पंडित लीलाधर शर्मा ने सुनाई व्रत कथा; व्रती महिलाओं को भेंट की गई चुनरी
रामगढ़, झारखंड : शहर के झंडा चौक स्थित माता वैष्णो देवी मंदिर परिसर में गुरुवार की संध्या करवा चौथ व्रत कथा का आयोजन किया गया। इसमें रामगढ़ और आसपास के क्षेत्रों की 251 सुहागिन महिलाओं ने भाग लिया। महिलाओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर मां करवा की कथा सुनी और अपने पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि तथा अखंड सौभाग्य की कामना की।
कार्यक्रम का आयोजन पंजाबी हिंदू बिरादरी की ओर से किया गया था। बिरादरी ने व्रतधारी महिलाओं के लिए मंदिर परिसर में करवा चौथ की कथा सुनने की विशेष व्यवस्था की थी। इस धार्मिक आयोजन में पंजाबी समुदाय के साथ अन्य समाजों की महिलाओं ने भी उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।
पंडित लीलाधर शर्मा ने सुनाई व्रत कथा
माता वैष्णो देवी मंदिर के पुजारी पंडित लीलाधर शर्मा ने पारंपरिक विधि से महिलाओं को करवा चौथ की कथा सुनाई। हाथों में पूजा की थाली लेकर पहुंचीं व्रती महिलाओं की उपस्थिति से मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठा। महिलाओं ने मां करवा की पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-शांति और वैवाहिक जीवन की मंगलकामना की।
आयोजन के दौरान पंजाबी हिंदू बिरादरी के पदाधिकारियों ने व्रत रखने वाली महिलाओं और कथा सुनने पहुंचीं अन्य महिलाओं को माता वैष्णो देवी के आशीर्वाद स्वरूप चुनरी भेंट की।
पति की लंबी आयु के लिए रखा जाता है व्रत
पंजाबी हिंदू बिरादरी के महासचिव एवं वरिष्ठ पत्रकार महेश मारवाह ने बताया कि करवा चौथ कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाने वाला सुहागिन महिलाओं का महत्वपूर्ण पर्व है। इस दिन महिलाएं सूर्योदय से पहले स्नान आदि कर व्रत का संकल्प लेती हैं और दिनभर निर्जला उपवास रखती हैं।
संध्या के समय व्रत कथा सुनने और पूजा-अर्चना के बाद चंद्रमा के दर्शन कर अर्घ्य देने की परंपरा है। इसके बाद पति के हाथों जल ग्रहण कर महिलाएं अपना व्रत खोलती हैं। उन्होंने बताया कि कई अविवाहित कन्याएं भी मनपसंद वर और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ पूजा-अर्चना करती हैं।
करवा चौथ के अवसर पर महिलाएं पहले से ही तैयारियां शुरू कर देती हैं। पर्व के दिन पारंपरिक वस्त्रों और आभूषणों से सजकर पूजा में शामिल होने की परंपरा इसे विशेष बनाती है।
आयोजन में बिरादरी के पदाधिकारियों का योगदान
कार्यक्रम के सफल आयोजन में पंजाबी हिंदू बिरादरी के अध्यक्ष सुरत चन्द्र वासुदेव और महासचिव महेश मारवाह का सराहनीय योगदान रहा। आयोजन में शामिल महिलाओं ने सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना कर परिवार की खुशहाली और अखंड सौभाग्य की कामना की।