रामगढ़ कैंट, झारखंड : झारखंड सरकार ने वर्ष 2026 में राज्य में रोड कनेक्टिविटी पर विशेष फोकस करने की बात कही है और राज्य के विभिन्न जिलों में सड़कों के लिए मंजूर की गयी राशि का जिक्र किया है। साहिबगंज और तालेहार समेत कई जिलों में पहले से 100 करोड़ से अधिक की राशि मंजूर होकर तत्काल कार्य के लिए निर्धारित की जा चुकी है। इसके बावजूद रामगढ़ (झारखंड) की एक प्रमुख सड़क योजना अब भी लंबित पड़ी है और उसे मंजूरी नहीं मिल पायी है।
लंबे समय से पटेल चौक से वाया सुभाष चौक, गांधी चौक, रांची रोड भरेंचनगर होते हुए फोर लेन तक की सड़क को फोर लेन बनाने की योजना झारखंड सरकार के समक्ष लंबित है। इस महत्वपूर्ण परियोजना का डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार हो गया था और प्रशासनिक स्वीकृति के लिए राज्य सरकार को भेजा गया था। यह योजना लगभग 277 करोड़ रुपये की है, जिसमें दो नए पुलों का निर्माण, सड़क का डिवाइडर सहित चौड़ीकरण और कुछ भूमि अधिग्रहण का प्रावधान शामिल है।
दो-तीन वर्ष पूर्व इस योजना को लेकर सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी और गोमिया के तत्कालीन विधायक लंबोदर महतो ने राज्य सरकार के समक्ष बात रखी थी और केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से भी मिलकर इस योजना को केंद्रीय परियोजना के रूप में लेने तथा राशि उपलब्ध कराने की मांग की थी। इसके बावजूद योजना के अनुमोदन की दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है।
स्थानीय जानकारों का कहना है कि इस योजना के लंबित रहने का मुख्य कारण स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उदासीनता और पहल न होना है। न तो सांसद और न ही विधायक ने हाल के दिनों में इस योजना के लिए सशक्त आवाज उठायी है। इसके विपरीत, जनप्रतिनिधि आजकल डीएमएफटी (District Mineral Foundation Trust) फंड से योजनाओं को लेने में व्यस्त नजर आते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि डीएमएफटी फंड की योजनाएं अपेक्षाकृत कम राशि की होती हैं और इनमें जनप्रतिनिधि अपने पक्ष के लोगों को फायदा पहुंचाने में अधिक सक्षम रहते हैं। इसके साथ ही डीएमएफटी योजना में अनियमितता और अनुचित खर्च के आरोप भी अक्सर उठते रहे हैं।
पटेल चौक से लेकर कुजू फोर लेन की इस योजना की अनुमानित लागत लगभग 270 करोड़ रुपये है और इसका टेंडर राज्य स्तर पर होगा। इस वजह से स्थानीय ठेकेदार इस स्तर पर प्रतिस्पर्धा नहीं कर पायेंगे तथा जनप्रतिनिधियों को भी इस मामले को मैनेज करने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है, ऐसा स्थानीय स्तर पर कहा जा रहा है।
आकलन यह है कि अगर यह योजना समय पर लागू हो जाती है तो इससे न केवल रामगढ़ शहर (झारखंड) बल्कि पूरे जिले को लाभ मिलेगा और शहर में लंबे समय से जाम की समस्या से भी निजात मिलेगी। लोगों की उम्मीद है कि वर्ष 2026 में जनप्रतिनिधि इस योजना के प्रति गंभीर होंगे और इसे मंजूर कराने में पहल करेंगे ताकि आम जनता को इसका लाभ मिल सके।