श्री कृष्ण विद्या मंदिर में लोहड़ी उत्सव का भव्य आयोजन, सांस्कृतिक विरासत से रू-ब-रू हुए विद्यार्थी

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रामगढ़ (झारखंड) : श्री कृष्ण विद्या मंदिर के प्रांगण में बुधवार को लोहड़ी पर्व का आयोजन पारंपरिक उल्लास, सांस्कृतिक गरिमा और शैक्षिक संदेश के साथ किया गया। इस अवसर पर विद्यालय परिसर में उत्तर भारत की समृद्ध लोक परंपरा की झलक देखने को मिली, जहां विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक इस लोकपर्व का आनंद लिया।

कार्यक्रम के दौरान प्रतीकात्मक अलाव प्रज्वलित किया गया, जिसके चारों ओर छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों ने पारंपरिक लोकगीतों के साथ परिक्रमा की। तिल, गुड़, रेवड़ी और मूंगफली अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की गई। विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक नृत्य और कार्यक्रमों ने पूरे वातावरण को उल्लास और उमंग से भर दिया।

इस अवसर पर शिक्षकों ने विद्यार्थियों को लोहड़ी पर्व के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि लोहड़ी कृषि सभ्यता से जुड़ा पर्व है, जो शीत ऋतु के अंत, सूर्य के उत्तरायण होने और नई फसल के स्वागत का प्रतीक है। साथ ही यह भी संदेश दिया गया कि जिस प्रकार किसान वर्ष भर परिश्रम कर फसल प्राप्त करता है, उसी तरह विद्यार्थी निरंतर मेहनत से ज्ञान और सफलता अर्जित करते हैं।

शिक्षकों ने यह भी कहा कि भले ही झारखंड भौगोलिक रूप से पंजाब क्षेत्र से अलग है, लेकिन यहां की लोकसंस्कृति भी प्रकृति पूजा, कृषि और सामूहिक उत्सवों से गहराई से जुड़ी हुई है। झारखंड के सरहुल, कर्मा और सोहराय जैसे पर्व भी परिश्रम और फसल उत्सव के प्रतीक हैं, जिससे लोहड़ी और झारखंड की संस्कृति के मूल भाव एक समान दिखाई देते हैं।

विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष आनंद अग्रवाल (अधिवक्ता) ने सभी अभिभावकों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को लोहड़ी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारत की सांस्कृतिक विविधता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है। ऐसे पर्व अनेकता में एकता का संदेश देते हैं और समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं।

कार्यक्रम की सफलता में विद्यालय प्रशासक एस. पी. सिन्हा, प्रभारी प्राचार्य विजय तिवारी सहित शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सभी के सहयोग से बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ लोहड़ी पर्व मनाया और कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।