रामगढ़ (झारखंड) : बसंत पंचमी के पावन अवसर पर श्री कृष्ण विद्या मंदिर परिसर विद्या, विवेक और संस्कृति की दिव्य आभा से आलोकित हो उठा। ज्ञान, कला और चेतना की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती की विधिवत पूजा-अर्चना विद्यालय में श्रद्धा, उल्लास और पारंपरिक मर्यादा के साथ संपन्न हुई।
इस अवसर पर विद्यालय के मुख्य मंच को आकर्षक पूजा पंडाल का स्वरूप दिया गया, जहां श्वेत रंगों की सादगी और सौम्य सजावट के बीच मां सरस्वती की मनोहारी प्रतिमा की स्थापना की गई। संपूर्ण पंडाल ज्ञान, शांति और पवित्रता का प्रतीक बनकर उपस्थित जनसमूह को आध्यात्मिक अनुभूति से भरता नजर आया।
कलात्मक पंडाल बना आकर्षण का केंद्र
हर वर्ष की तरह इस बार भी विद्यालय के गणित शिक्षक विक्रम सिंह की सृजनात्मक सोच और कलात्मक दृष्टि पंडाल सज्जा में स्पष्ट दिखाई दी। उनकी परिकल्पना और सूक्ष्म सजावटी कार्य ने पूजा स्थल को विशिष्ट पहचान दी, जिसमें भारतीय संस्कृति और शैक्षिक मूल्यों का सुंदर समावेश देखने को मिला।
वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न हुई पूजा
पूजा-अर्चना स्थानीय क्षेत्र के वरिष्ठ एवं प्रतिष्ठित पंडित के सानिध्य में विधिपूर्वक संपन्न हुई। इस दौरान विद्यालय के अतिथि, प्रबंधन, शिक्षकगण, छात्र-छात्राएं एवं अभिभावक श्रद्धा भाव से मां सरस्वती की आराधना में सम्मिलित हुए। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विद्या, विवेक, चरित्र निर्माण और उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई।
शिक्षा के उद्देश्य पर दिया गया संदेश
पूजा उपरांत शैक्षिक एवं प्रेरणादायक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। शिक्षकों ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल शैक्षणिक उपलब्धियां नहीं, बल्कि नैतिक, संस्कारित और जिम्मेदार नागरिक का निर्माण करना है। उनके विचारों ने छात्रों में अनुशासन, परिश्रम और आत्मविकास की भावना को मजबूत किया।
प्रसाद वितरण के साथ हुआ समापन
कार्यक्रम का समापन विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच श्रद्धा भाव से प्रसाद वितरण के साथ हुआ। यह क्षण आपसी सौहार्द, समानता और सहभागिता का प्रतीक बना, जिससे विद्यालय और अभिभावकों के संबंध और अधिक सुदृढ़ हुए।
संपूर्ण आयोजन को सफल बनाने में विद्यालय के सभी शिक्षकों की भूमिका सराहनीय रही। यह आयोजन न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान रहा, बल्कि शिक्षा, संस्कार और सांस्कृतिक चेतना को प्रोत्साहित करने वाला प्रेरणादायक अवसर भी सिद्ध हुआ।