भुरकुंडा (रामगढ़), झारखंड : भुरकुंडा क्षेत्र अंतर्गत रीवर साइड दुंदुआ निवासी धनीराम मांझी की पत्नी नीता देवी (30 वर्ष) की प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव के कारण मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने भुरकुंडा सेवा सदन परिसर में जमकर हंगामा करते हुए अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया।
परिजनों ने बताया कि नीता देवी लगभग आठ माह की गर्भवती थीं। 28 फरवरी को पेट में दर्द होने पर उन्हें भुरकुंडा सेवा सदन में भर्ती कराया गया था। जांच के बाद चिकित्सकों ने तत्काल ऑपरेशन की आवश्यकता बताई और चार यूनिट रक्त की व्यवस्था करने को कहा गया, जिसे परिजनों ने उपलब्ध करा दिया।
परिजनों के अनुसार ऑपरेशन के बाद महिला को लगातार रक्तस्राव होने लगा। इसकी जानकारी बार-बार देने के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ। बाद में डॉक्टरों ने गर्भाशय निकालने की सलाह दी, जिस पर परिजनों की सहमति से पुनः शल्य प्रक्रिया की गई, लेकिन इसके बाद भी रक्तस्राव नहीं रुका।
महिला की हालत गंभीर होने पर उसे बाहर रेफर कर दिया गया। परिजन उसे लेकर रांची के कई अस्पतालों में पहुंचे, लेकिन वहां भर्ती नहीं लिया गया। अंततः राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में इलाज के दौरान नीता देवी की मौत हो गई।
इधर, घटना की जानकारी मिलते ही दुंदुआ और हुरूमगढ़ा गांव के ग्रामीण बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंचे और विरोध प्रदर्शन किया। बढ़ते तनाव को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों को कुल आठ लाख रुपये के दो चेक तथा 10 हजार रुपये नकद सहायता देने का लिखित आश्वासन दिया।
अस्पताल के चिकित्सक डॉ. पी.सी. हांसदा ने कहा कि इलाज में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती गई है और मरीज की स्थिति पहले से ही अत्यंत गंभीर थी।
वहीं, नवजात शिशु का इलाज रामगढ़ स्थित एक निजी अस्पताल में चल रहा है।
फिलहाल पूरे मामले को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। परिजनों और स्थानीय लोगों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की है।