अमेरिकी आयोग की रिपोर्ट में भारत पर सवाल, आरएसएस और रॉ पर प्रतिबंध की सिफारिश से बढ़ी बहस

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नई दिल्ली / वाशिंगटन :  अमेरिका के एक सरकारी सलाहकार आयोग ने अपनी नई वार्षिक रिपोर्ट 2026 में भारत को लेकर कई विवादित सिफारिशें की हैं। आयोग ने अमेरिकी प्रशासन से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भारत की बाह्य खुफिया एजेंसी ‘रिसर्च एंड एनालिसिस विंग’ (रॉ) पर लक्षित प्रतिबंध लगाने पर विचार करने की सलाह दी है। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस शुरू हो गई है।

यह रिपोर्ट अमेरिका के “अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग” (यूएससीआईआरएफ) ने जारी की है। यह आयोग अमेरिकी संसद के अधिनियम के तहत गठित एक स्वतंत्र निकाय है, जिसका उद्देश्य दुनिया भर में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति का अध्ययन कर अमेरिकी सरकार को सुझाव देना है।

रिपोर्ट में आयोग ने भारत को “विशेष चिंता वाले देशों” की श्रेणी में शामिल करने की सिफारिश की है। आयोग का कहना है कि वर्ष 2025 के दौरान भारत में धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े मामलों को लेकर चिंताजनक घटनाएं सामने आई हैं। इसी आधार पर उसने अमेरिकी प्रशासन से कुछ कड़े कदमों पर विचार करने को कहा है।

आयोग की सिफारिशों में यह भी कहा गया है कि भारत के साथ रक्षा उपकरणों की बिक्री और व्यापारिक समझौतों को धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े सुधारों के साथ जोड़ा जाए। साथ ही आरएसएस से जुड़े लोगों पर यात्रा प्रतिबंध और संगठन की संपत्तियों पर कार्रवाई जैसे कदमों का भी सुझाव दिया गया है।

रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ राज्यों में धर्म परिवर्तन से जुड़े कानूनों को और सख्त किया गया है तथा अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े मुद्दों पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई है। इसके अलावा वक्फ संशोधन कानून और कुछ राज्यों के शिक्षा संबंधी प्रावधानों की भी आलोचना की गई है।

हालांकि भारत सरकार ने इस नई रिपोर्ट पर अभी आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। लेकिन इससे पहले विदेश मंत्रालय ऐसे ही 2025  वर्ष के आकलनों को पक्षपाती और राजनीति से प्रेरित बताकर खारिज करता रहा है। सरकार का कहना रहा है कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था और सामाजिक विविधता को समझे बिना इस तरह की रिपोर्ट तैयार की जाती हैं।

भारत सरकार पहले भी इस आयोग के प्रतिनिधियों को वीजा देने से इनकार कर चुकी है और ऐसी रिपोर्टों को तथ्यों से परे बताते हुए अस्वीकार करती रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस रिपोर्ट के बाद भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक स्तर पर चर्चा तेज हो सकती है।