रामगढ़, झारखंड : स्वास्थ्य विभाग द्वारा 28 मार्च 2026 को एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) टीकाकरण को लेकर जिला टास्क फोर्स की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता आशीष अग्रवाल ने उप विकास आयुक्त कार्यालय के सभागार में की।
इस बैठक का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्यकर्मियों, नर्सों, आंगनवाड़ी सेविकाओं और अन्य अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं को एचपीवी संक्रमण, इससे होने वाले गर्भाशय ग्रीवा कैंसर तथा टीकाकरण के महत्व के बारे में जागरूक करना था।
कार्यक्रम में चिकित्सक डॉ० मयंक ने एचपीवी वायरस के प्रकार, इसके फैलने के तरीके, लक्षण, बचाव और टीकाकरण के लाभों की विस्तार से जानकारी दी। साथ ही टीके के सुरक्षित उपयोग, खुराक निर्धारण, लक्षित आयु वर्ग और संभावित दुष्प्रभावों के प्रबंधन पर भी प्रकाश डाला गया।
जिला आरसीएच पदाधिकारी डॉ० मृत्युंजय कुमार सिंह ने बताया कि यह टीकाकरण गर्भाशय ग्रीवा कैंसर की रोकथाम का प्रभावी उपाय है और अब तक लाखों लोगों को सुरक्षित रूप से दिया जा चुका है। उन्होंने कहा कि यह टीका 14 से 15 वर्ष की आयु की किशोरियों के लिए सबसे अधिक प्रभावी होता है।
वहीं सिविल सर्जन डॉ० अनील कुमार ने बताया कि महिलाओं में होने वाले कैंसरों में गर्भाशय ग्रीवा कैंसर एक गंभीर समस्या है, लेकिन एचपीवी टीकाकरण से इससे काफी हद तक बचाव संभव है।
बैठक के दौरान उप विकास आयुक्त ने संबंधित विभागों को समन्वय बनाकर कार्ययोजना तैयार करने और लक्ष्य की शत-प्रतिशत प्राप्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
विशेषज्ञों ने बताया कि एचपीवी एक सामान्य वायरस है, जो त्वचा के संपर्क से फैलता है। इसके कुछ प्रकार साधारण मस्से पैदा करते हैं, जबकि उच्च जोखिम वाले प्रकार गर्भाशय ग्रीवा, गुदा और गले के कैंसर का कारण बन सकते हैं।
बैठक में शिक्षा, समाज कल्याण, पंचायती राज, स्वास्थ्य सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, चिकित्सक, कार्यक्रम पदाधिकारी और अन्य कर्मी उपस्थित रहे।
बताया गया किएचपीवी टीकाकरण केवल एक साधारण टीका नहीं, बल्कि भविष्य में गंभीर बीमारी से बचाव का मजबूत माध्यम है। अभिभावकों को अपनी बेटियों के स्वास्थ्य के लिए इस दिशा में जागरूक रहने की आवश्यकता है।