रामगढ़ कैंट (झारखंड) : शांतिधारा फ़ाउंडेशन तथा पंचवटी आईवी वेलफ़ेयर एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में सोसाइटी के कम्युनिटी हॉल में श्रीमद्भागवत गीता पर एक व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस अवसर पर डॉ. के. चन्द्रा मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित थे।
कार्यक्रम की शुरुआत में डॉ. चन्द्रा को पौधा प्रदान कर तथा शाल ओढ़ाकर उनका अभिनंदन किया गया। अपने व्याख्यान में डॉ. चन्द्रा ने श्रीमद्भागवत गीता के प्रथम से पंचम अध्याय तक के श्लोकों की सरल शब्दों में संक्षिप्त व्याख्या प्रस्तुत की।
उन्होंने कहा कि वेद ज्ञान रूपी गाय है और गीता उसका दूध है। गीता हमें कर्मयोग का संदेश देती है और सिखाती है कि व्यक्ति को आसक्ति रहित होकर, हार-जीत की भावना से ऊपर उठकर अपने कर्म करते रहना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि ज्ञानयोग और कर्मयोग के माध्यम से ही ईश्वर की प्राप्ति संभव है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता एवं संचालन शांतिधारा फ़ाउंडेशन के संस्थापक एवं अध्यक्ष सुरेश पी अग्रवाल ने किया, जबकि कार्यकारी अध्यक्ष गोविंद लाल अग्रवाल ने स्वागत भाषण दिया। सोसायटी के अध्यक्ष मोहन कुमार झा ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
इस अवसर पर शांतिधारा फ़ाउंडेशन की ओर से डॉ. के. चन्द्रा को गीता प्रेस, गोरखपुर द्वारा प्रकाशित श्रीमद्भागवत गीता की विशेष प्रति भेंट की गई।
कार्यक्रम में डॉ. एन. डी. सहाय, डॉ. इन्द्रा सहाय, रतन जैन, प्रभात अग्रवाल, मोतीलाल अग्रवाल, सुरेश चन्द्र अग्रवाल, के. बी. चौधरी, ए. के. पांडेय, शंभु शंकर, एस. के. शर्मा, पी. पी. सिंह, अनिता राजगढ़िया, कविता अग्रवाल, सुनीता अरोड़ा, रीमा अग्रवाल, संतोष खंडेलवाल एवं कुमुद चौधरी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।