झारखंड : रामगढ़ के रजरप्पा धाम में बड़ी कार्रवाई, 254 दुकानों पर चला प्रशासन का बुलडोजर, पुनर्वास की मांग तेज

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रजरप्पा (रामगढ) : झारखंड के रामगढ़ जिले स्थित प्रसिद्ध रजरप्पा धाम मंदिर क्षेत्र में गुरुवार को प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने को लेकर व्यापक अभियान चलाया। यह कार्रवाई झारखंड उच्च न्यायालय के निर्देशों के पालन में की गई, जिसके तहत मंदिर परिसर में लंबे समय से चल रही 254 दुकानों को हटाया गया।

सुबह से ही पूरे क्षेत्र में प्रशासनिक हलचल तेज रही। भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती के बीच जेसीबी और बुलडोजर के जरिए दुकानों को हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई। पूरे अभियान के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।

कार्रवाई के बाद मंदिर परिसर का स्वरूप पूरी तरह बदल गया। जहां पहले दुकानों की पंक्तियां और श्रद्धालुओं की चहल-पहल रहती थी, वहां अब मलबा और खाली स्थान दिखाई देने लगा। इस दौरान कई दुकानदार भावुक भी नजर आए, क्योंकि उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

प्रशासन के अनुसार, मंदिर क्षेत्र में वर्षों से अनियोजित ढंग से दुकानें संचालित हो रही थीं, जिससे अव्यवस्था बढ़ रही थी। न्यायालय के आदेश के बाद पूरे इलाके को अतिक्रमण मुक्त करने का निर्णय लिया गया। कार्रवाई से पहले दुकानदारों को नोटिस देकर और माइकिंग के जरिए जानकारी दी गई थी, ताकि वे अपने सामान को सुरक्षित हटा सकें।

इस अभियान का नेतृत्व अनुमंडल पदाधिकारी अनुराग तिवारी और पुलिस उपाधीक्षक चंदन वत्स ने किया। उनके साथ भूमि सुधार उपसमाहर्ता दीप्ति प्रियंका कुजूर, अंचल अधिकारी दीपक मिंज (चितरपुर), तृप्ति विजया कुजूर (मांडू), किशोरी यादव (दुलमी), सीताराम महतो (गोला), रमेश रविदास (रामगढ़), मनोज कुमार चौरसिया (पतरातू) सहित कुल 13 दंडाधिकारी मौजूद रहे। रजरप्पा थाना प्रभारी कृष्ण कुमार भी पूरे अभियान में सक्रिय रूप से तैनात रहे।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह कदम क्षेत्र के प्रस्तावित पुनर्विकास योजना का हिस्सा है। योजना के तहत मंदिर परिसर को अधिक सुव्यवस्थित, स्वच्छ और सुविधाजनक बनाया जाएगा। भविष्य में यहां पार्किंग, पेयजल, स्वच्छता और सुरक्षा की बेहतर व्यवस्था विकसित करने की तैयारी है।

वहीं, प्रभावित दुकानदारों ने इस कार्रवाई को लेकर अपनी पीड़ा व्यक्त की है। रजरप्पा मंदिर परिसर सर्वांगीण विकास ट्रस्ट के अध्यक्ष कुलदीप साव ने कहा कि वे न्यायालय के आदेश का सम्मान करते हैं, लेकिन अचानक हुई इस कार्रवाई से सैकड़ों परिवारों की आजीविका प्रभावित हो गई है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि सभी प्रभावितों के लिए जल्द पुनर्वास की व्यवस्था की जाए, ताकि वे दोबारा अपना रोजगार शुरू कर सकें।

यह पूरी कार्रवाई जहां एक ओर विकास और व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, वहीं दूसरी ओर इससे जुड़े मानवीय पहलू को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन प्रभावित लोगों के पुनर्वास को लेकर क्या ठोस कदम उठाता है।