रामगढ़ (झारखंड) : श्री कृष्ण विद्या मंदिर में ‘मदर्स डे’ के अवसर पर आयोजित मातृ दिवस समारोह प्रेम, वात्सल्य और भावनाओं का अनुपम उत्सव बन गया। विद्यालय परिसर उस समय ममता, संस्कार और आत्मीयता के अद्भुत संगम में परिवर्तित हो गया, जब माताओं और बच्चों ने एक साथ मंच पर जीवन के सबसे पवित्र रिश्ते को साकार किया।
कार्यक्रम की थीम केवल माताओं को सम्मानित करना नहीं, बल्कि उन्हें पूरे आयोजन की आत्मा बनाना था। इसी उद्देश्य से सभी विद्यार्थियों की माताओं को विशेष आमंत्रण भेजा गया और विभिन्न गतिविधियों में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई।
कार्यक्रम का संचालन कक्षा नौवीं के छात्र तौकीर और छात्रा आशी ने आकर्षक शैली में किया। समारोह का शुभारंभ विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष आनंद अग्रवाल (अधिवक्ता), सचिव बिमल किशोर जाजू, संयुक्त सचिव अशोक अग्रवाल तथा विशिष्ट अतिथियों संजय अग्रवाल, शिवकुमार गोयल और शुभम गोयल के स्वागत के साथ हुआ। दीप प्रज्वलन के बाद कार्यक्रम ने भावनात्मक ऊंचाइयों को छूना शुरू किया।
कक्षा दसवीं की छात्रा अक्षिता सिंह ने ‘मां के बराबरी क्या कोई कर पाएगा’ कविता की मार्मिक प्रस्तुति देकर उपस्थित माताओं की आंखें नम कर दीं। इसके बाद विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत नाटिका में मां के त्याग, संघर्ष और संरक्षण की अनकही कहानियों को संवेदनशील ढंग से मंचित किया गया।
‘गुब्बारा फुलाओ और फोड़ो’ जैसे मनोरंजक खेलों में माताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कक्षा दसवीं की छात्रा शिखा कुमारी ने ‘मां तुम हो तो हम हैं’ कविता के माध्यम से मातृत्व के महत्व को भावपूर्ण शब्दों में अभिव्यक्त किया।
कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण ‘ब्लाइंडफोल्ड गेम’ रहा, जिसमें माताओं ने केवल स्पर्श के आधार पर अपने बच्चों की पहचान कर ली। इस दृश्य ने यह सिद्ध कर दिया कि मां और संतान का संबंध संवेदनाओं और आत्मिक जुड़ाव का अद्वितीय बंधन है।
जूनियर वर्ग की माताओं और बच्चों द्वारा संयुक्त नृत्य ने प्रेम और संस्कारों का सुंदर दृश्य प्रस्तुत किया। वहीं कक्षा पहली और दूसरी के नन्हे विद्यार्थियों ने ‘तेरी उंगली पकड़ के चला’ गीत पर मनमोहक प्रस्तुति देकर सभी का दिल जीत लिया।
विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष आनंद अग्रवाल ने कहा कि मां ही संस्कारित समाज और सशक्त राष्ट्र की पहली आधारशिला होती है। उन्होंने सभी माताओं को मातृ दिवस की शुभकामनाएं देते हुए उनके योगदान को नमन किया।
कार्यक्रम की सफलता में विद्यालय के शिक्षकों, विद्यार्थियों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की भूमिका सराहनीय रही। अभिभावकों की उत्साहपूर्ण सहभागिता ने यह स्पष्ट कर दिया कि विद्यालय की शैक्षणिक उत्कृष्टता, संस्कारपूर्ण वातावरण और बच्चों के सर्वांगीण विकास के प्रति उनका विश्वास और भी मजबूत हुआ है।