शंघाई में भारत का स्वर्णिम परचम, दीपिका कुमारी की अगुवाई में महिला रिकर्व टीम ने चीन को हराकर जीता गोल्ड

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शंघाई (चीन) / नई दिल्ली : दीपिका कुमारी, अंकिता भकत और कुमकुम मोहोद की भारतीय महिला रिकर्व टीम ने शंघाई में आयोजित तीरंदाजी विश्व कप के दूसरे चरण में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। भारतीय टीम ने मेजबान चीन को रोमांचक फाइनल में शूट-ऑफ के जरिए 5-4 (28-26) से पराजित किया।

मुकाबले की शुरुआत से ही दोनों टीमों के बीच कड़ा संघर्ष देखने को मिला। भारत ने पहला सेट 54-53 से जीतकर बढ़त बनाई। दूसरे सेट में चीन ने वापसी करते हुए 55-52 से जीत दर्ज की और स्कोर 2-2 से बराबर कर दिया। तीसरे सेट में चीन ने 57-56 से जीत हासिल कर 4-2 की बढ़त बना ली।

चौथे सेट में भारतीय टीम ने दबाव के बीच शानदार प्रदर्शन किया। दीपिका कुमारी ने लगातार दो बार 10 अंक हासिल किए। भारत ने 54 अंक बनाए। चीन को मैच जीतने के लिए अंतिम तीन तीरों में दो बार 10 और एक बार 9 अंक की जरूरत थी, लेकिन उसकी युवा तीरंदाज यू क्यूई निर्णायक क्षण में केवल 8 अंक ही जुटा सकीं। इसके साथ ही मुकाबला बराबरी पर पहुंच गया और परिणाम के लिए शूट-ऑफ कराया गया।

निर्णायक शूट-ऑफ में अंकिता भकत ने 9 अंक, कुमकुम मोहोद ने शानदार 10 अंक और दीपिका कुमारी ने दबाव के बीच 9 अंक हासिल किए। भारत ने कुल 28 अंक बनाए, जबकि चीन 26 अंक ही जुटा सका। इस तरह भारतीय टीम ने स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया।

यह भारत का 2021 के बाद पहला महिला रिकर्व टीम विश्व कप स्वर्ण पदक है। साथ ही पिछले तीन वर्षों में महिला रिकर्व टीम का यह पहला विश्व कप पदक भी है। दीपिका कुमारी के करियर का यह सातवां विश्व कप टीम स्वर्ण पदक है।

भारतीय टीम ने फाइनल में पहुंचने से पहले सेमीफाइनल में दक्षिण कोरिया जैसी दिग्गज टीम को हराकर बड़ा उलटफेर किया था। दक्षिण कोरिया को तीरंदाजी की दुनिया की सबसे सफल टीमों में गिना जाता है।

इस प्रतियोगिता में भारत का यह दूसरा पदक रहा। इससे पहले साहिल जाधव ने कंपाउंड स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर भारत का खाता खोला था। वहीं सिमरनजीत कौर भी प्रतियोगिता में पदक की दौड़ में बनी हुई हैं।

बिना पूर्णकालिक राष्ट्रीय कोच के टूर्नामेंट में उतरी भारतीय टीम ने अनुभव, संयम और आत्मविश्वास के दम पर यह उपलब्धि हासिल की। दीपिका कुमारी ने पूरे टूर्नामेंट में नेतृत्वकारी भूमिका निभाते हुए अपनी साथी खिलाड़ियों का मनोबल बनाए रखा और निर्णायक क्षणों में टीम को जीत तक पहुंचाया।

भारत की इस स्वर्णिम सफलता ने अंतरराष्ट्रीय तीरंदाजी जगत में एक बार फिर देश की मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है।