चुट्टूपालू घाटी में सड़क दुर्घटनाओं के मद्देनजर उपायुक्त एवं पुलिस अधीक्षक ने पीडी एनएचएआई व एनएचएआई 33 की तकनीकी टीम के साथ किया विस्तृत निरीक्षण 

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■ घाटी के दोनों छोर पर सघन वाहन जांच अभियान चलाने का निर्देश, तीन दिनों में शॉर्ट टर्म एवं लॉन्ग टर्म मेजर का विस्तृत प्लान उपलब्ध कराने को कहा।

 रामगढ़, झारखंड : रामगढ़ जिले के चुट्टूपालू घाटी क्षेत्र में हो रही सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम एवं यातायात व्यवस्था को और अधिक सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से आज उपायुक्त श्री ऋतुराज एवं पुलिस अधीक्षक श्री मुकेश कुमार लुनायत ने परियोजना निदेशक एनएचएआई रांची श्री बिजय कुमार व एनएच-33 (रांची हजारीबाग) की एनएचएआई तकनीकी टीम के साथ चुट्टूपालू घाटी का विस्तृत निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान घाटी के विभिन्न संवेदनशील स्थलों का गहन अवलोकन करते हुए दुर्घटनाओं के कारणों, सड़क की भौगोलिक स्थिति, यातायात दबाव तथा आवश्यक सुरक्षा उपायों की समीक्षा की गई।

निरीक्षण के दौरान उपायुक्त एवं पुलिस अधीक्षक के द्वारा पीडी एनएचएआई एवं उनकी टीम से सड़क दुर्घटनाओं के कारणों एवं दुर्घटना कम करने के उपायों की जानकारी ली गई। मौके पर पीडी एनएचएआई एवं उनकी टीम के द्वारा शॉर्ट टर्म मेजर एवं लॉन्ग टर्म मेजर के तहत दुर्घटना रोकथाम की दिशा में किए जाने वाले कार्यों को लेकर कई महत्वपूर्ण जानकारियां सभी के साथ साझा की गई।

शॉर्ट टर्म मेजर के अंतर्गत पीडी एनएचएआई ने घाटी के विभिन्न स्थानों पर स्पीड डिस्प्ले मीटर एवं गति नियंत्रण संबंधी उपकरण स्थापित करने का सुझाव दिया, ताकि वाहन चालक निर्धारित गति सीमा का पालन कर सकें। साथ ही घाटी में निर्मित एस्केप लेन को शीघ्र पूर्ण रूप से क्रियाशील (फंक्शनल) करने का भी निर्देश दिया गया, जिससे ब्रेक फेल अथवा नियंत्रण खोने की स्थिति में भारी वाहनों को सुरक्षित रोका जा सके।

उपायुक्त ने एनएचएआई की तकनीकी टीम को निर्देशित किया कि आगामी तीन दिनों के भीतर चुट्टूपालू घाटी में दुर्घटना रोकथाम के लिए शॉर्ट टर्म मेजर एवं लॉन्ग टर्म मेजर के अंतर्गत किए जाने वाले सभी कार्यों का विस्तृत कार्ययोजना (प्लान) तैयार कर जिला प्रशासन को उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि योजना में प्रत्येक कार्य की समय-सीमा, तकनीकी विवरण तथा क्रियान्वयन की स्पष्ट रूपरेखा शामिल होनी चाहिए।

निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने एनएचएआई के अधिकारियों को निर्देश दिया कि लगभग पांच किलोमीटर लंबी घाटी का प्रत्येक 100 मीटर पर तकनीकी निरीक्षण कर विस्तृत प्रतिवेदन तैयार किया जाए। प्रतिवेदन में प्रत्येक संवेदनशील बिंदु, दुर्घटनाओं के संभावित कारण, आवश्यक सुरक्षा उपाय तथा इंजीनियरिंग आधारित समाधान का उल्लेख किया जाए, जिससे भविष्य में प्रभावी एवं स्थायी कदम उठाए जा सकें।

लॉन्ग टर्म मेजर की समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि चुट्टूपालू घाटी में वैकल्पिक मार्ग (अल्टरनेट रूट) विकसित करने की योजना भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में है। इस पर उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को भूमि अधिग्रहण सहित सभी आवश्यक प्रक्रियाओं को तीव्र गति से पूर्ण करने का निर्देश दिया, ताकि परियोजना का कार्य शीघ्र प्रारंभ किया जा सके और भविष्य में दुर्घटनाओं के जोखिम को स्थायी रूप से कम किया जा सके।

पुलिस अधीक्षक ने भी यातायात नियमों के कड़ाई से अनुपालन, भारी वाहनों की नियमित जांच, ओवरस्पीडिंग पर प्रभावी कार्रवाई तथा सड़क सुरक्षा संबंधी जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पुलिस एवं जिला प्रशासन समन्वित रूप से कार्य करते हुए चुट्टूपालू घाटी को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएंगे। मौके पर पुलिस अधीक्षक के द्वारा किसी प्रकार की सड़क दुर्घटना होने पर एनएचएआई को त्वरित दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को सड़क से हटाने एवं ट्रैफिक व्यवस्था बहाल करने का निर्देश दिया गया।

निरीक्षण के क्रम में उपायुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिया कि चुट्टूपालू घाटी के दोनों छोर पर नियमित रूप से सघन वाहन जांच अभियान चलाया जाए। इस दौरान विशेष रूप से नशे की हालत में वाहन चलाने वाले लोगों, सड़क सुरक्षा नियमों के अनुपालन की जांच की जाए ताकि दुर्घटनाओं की संभावना को न्यूनतम किया जा सके। निरीक्षण के दौरान जिला प्रशासन, पुलिस विभाग, एनएचएआई एवं संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।