बाल तस्करी के खिलाफ अग्रगति का निर्णायक अभियान, रामगढ़ में जागरूकता और रोकथाम पर रहेगा विशेष जोर

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रामगढ़ (झारखंड) : बच्चों की सुरक्षा एवं संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत गैर-सरकारी संस्था अग्रगति ने विश्व मानव दुर्व्यापार विरोधी दिवस के अवसर पर बाल तस्करी (चाइल्ड ट्रैफिकिंग) के खिलाफ निर्णायक अभियान चलाने का ऐलान किया है। संस्था निदेशक किरण शंकर दत्त ने  कहा कि सरकार, जिला प्रशासन और आम नागरिकों के सहयोग से रामगढ़ जिले में बाल तस्करी की रोकथाम के लिए व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा तथा मानव तस्करी में संलिप्त लोगों की पहचान कर उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।

संस्था निदेशक किरण शंकर दत्त के अनुसार, नई दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित चार दिवसीय राष्ट्रीय परामर्श “एनश्योरिंग चाइल्ड राइट्स   , पोटेंशियल  एंड  प्रोस्पेरिटी “ के दौरान देशभर के 782 जिलों से आए 250 से अधिक नागरिक समाज संगठनों के प्रतिनिधियों ने “नेशनल कैंपेन अगेंस्ट चाइल्ड ट्रैफिकिंग” की शुरुआत की। यह अभियान वर्ष 2030 तक संचालित किया जाएगा।

अग्रगति, बच्चों के अधिकारों के लिए कार्यरत नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (JRC) का सहयोगी संगठन है। संस्था के अनुसार, जेआरसी दुनिया का सबसे बड़ा कानूनी हस्तक्षेप कार्यक्रम संचालित कर रहा है। इसके सहयोगी संगठनों के प्रयासों से अप्रैल 2023 से दिसंबर 2025 के बीच देशभर में 1,22,516 बच्चों को मानव तस्करी से मुक्त कराया गया।

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने कहा कि किसी बच्चे का जीवन बचाना सबसे बड़ा मानवीय कार्य है। उन्होंने कहा कि मानव तस्करी की शिकार अनेक बच्चियां कभी अपने घर नहीं लौट पातीं और उन्हें बचाने वाले सामाजिक संगठन किसी फरिश्ते से कम नहीं हैं।

अग्रगति के निदेशक किरण शंकर दत्त ने कहा कि मानव तस्करी आज भी देश के सामने गंभीर चुनौती बनी हुई है। उन्होंने कहा कि उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रतिदिन कई बच्चे तस्करी का शिकार होते हैं तथा हर घंटे अनेक बच्चों के लापता होने की घटनाएं दर्ज होती हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे बच्चों की होती है जिन्हें बाद में जबरन मजदूरी, भिक्षावृत्ति, यौन शोषण अथवा अन्य प्रकार के शोषण में धकेल दिया जाता है।

उन्होंने कहा कि मानव तस्कर अक्सर बाहरी नहीं होते, बल्कि स्थानीय स्तर पर ही सक्रिय रहते हैं। वे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को नौकरी, बेहतर जीवन या अधिक आय का लालच देकर अपने साथ ले जाते हैं और बाद में उनका शोषण करते हैं।

किरण शंकर दत्त ने बताया कि अग्रगति का मुख्य उद्देश्य बाल तस्करी की रोकथाम, संवेदनशील परिवारों की पहचान, बच्चों को शिक्षा एवं सरकारी योजनाओं से जोड़ना तथा तस्करी से मुक्त कराए गए बच्चों का प्रभावी पुनर्वास सुनिश्चित करना है। संस्था प्रशासन के सहयोग से ऐसे परिवारों तक पहुंचेगी जो आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर हैं, ताकि उनके बच्चे शिक्षा से जुड़े रहें और मानव तस्करी के गिरोहों के झांसे में न आएं।

उन्होंने आम नागरिकों से भी अपील की कि यदि किसी बच्चे के संदिग्ध तरीके से ले जाए जाने, बाल मजदूरी, भिक्षावृत्ति या अन्य प्रकार के शोषण की जानकारी मिले तो इसकी सूचना तत्काल संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों या पुलिस को दें। उनका कहना था कि समाज, प्रशासन और नागरिक संगठनों के संयुक्त प्रयासों से ही बाल तस्करी जैसी गंभीर समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।