रामगढ़ कैंट, झारखंड : सरकारी अधिवक्ता, सिविल कोर्ट रामगढ़, संजीव कुमार अम्बष्ठ ने झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से अपील की है कि Mines and Minerals (Development and Regulation) Amendment Bill, 2026 से झारखंड को होने वाले संभावित आर्थिक नुकसान को लेकर राज्यभर में शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक जन-जागरूकता अभियान चलाया जाए।
उन्होंने कहा कि झारखंड खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है। यहां कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट समेत कई महत्वपूर्ण खनिजों का बड़े पैमाने पर खनन होता है। इन खनिजों से देश के औद्योगिक विकास को गति मिलती है, लेकिन खनन का प्रत्यक्ष प्रभाव झारखंड के लोगों और स्थानीय क्षेत्रों पर पड़ता है। विस्थापन के साथ-साथ जंगल, जलस्रोत, कृषि और पर्यावरण पर भी इसका असर देखने को मिलता है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बना राज्य का कानून
श्री अम्बष्ठ ने कहा कि 25 जुलाई 2024 को सुप्रीम कोर्ट की नौ न्यायाधीशों वाली संविधान पीठ ने Mineral Area Development Authority v. Steel Authority of India Ltd. मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था। इसके बाद झारखंड सरकार ने Jharkhand Mineral-Bearing Land Cess Act, 2024 बनाया।
उनके अनुसार उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर खनिज आधारित उपकर से राज्य को संभावित रूप से मिलने वाली आय इस प्रकार है—
2024-25: करीब 1,379 करोड़ रुपये
2025-26: करीब 7,488 करोड़ रुपये
2026-27: करीब 13,215 करोड़ रुपये
राज्य की आय प्रभावित होने की आशंका
संजीव कुमार अम्बष्ठ ने कहा कि यदि MMDR Amendment Bill, 2026 के प्रावधानों के कारण राज्य की इस तरह की आय सीमित होती है, तो झारखंड को हर वर्ष हजारों करोड़ रुपये के संभावित राजस्व नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। इसका असर शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पेयजल, रोजगार, ग्रामीण विकास तथा खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास से जुड़ी योजनाओं पर पड़ने की आशंका है।
उन्होंने कहा कि खनिज संपदा झारखंड की धरती से निकलती है और खनन का सामाजिक एवं पर्यावरणीय प्रभाव भी राज्य के लोगों को झेलना पड़ता है। ऐसे में खनिज संसाधनों से होने वाली आय में झारखंड और यहां के लोगों के हितों का उचित संरक्षण जरूरी है।
लोकतांत्रिक तरीके से लोगों को जागरूक करने की अपील
श्री अम्बष्ठ ने कहा कि यह मुद्दा केवल सरकार या किसी राजनीतिक दल तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य के व्यापक हित से जुड़ा विषय है। उन्होंने हेमंत सोरेन से अपील की कि विधेयक के संभावित प्रभावों को सरल भाषा में जनता तक पहुंचाने के लिए पूरे झारखंड में शांतिपूर्ण, संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीके से जन-जागरूकता अभियान चलाया जाए, ताकि आम लोग राज्य के खनिज संसाधनों और उनसे जुड़ी आय के अधिकारों को समझ सकें।