रामगढ़, झारखंड :विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर रामगढ़ सिविल सर्जन कार्यालय के सभागार में जागरूकता संगोष्ठी का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड के निर्देश पर जिला स्वास्थ्य समिति की ओर से आयोजित यह कार्यक्रम 10 से 16 सितंबर 2026 तक चलने वाले आत्महत्या रोकथाम सप्ताह के तहत हुआ।
संगोष्ठी की अध्यक्षता सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार ने की। कार्यक्रम में जिला नोडल पदाधिकारी डॉ. तूलिका रानी, डीआरसीएचओ डॉ. ठाकुर मृत्युंजय कुमार सिंह, एमओ टू सीएस डॉ. विवेक कुमार, डीपीए आमोद कुमार सहित डीपीएमयू के सभी कर्मी मौजूद रहे।
मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता पर जोर
कार्यक्रम के दौरान मानसिक स्वास्थ्य को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाने और आत्महत्या जैसी गंभीर समस्या की रोकथाम के उपायों पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने मानसिक तनाव, अवसाद और भावनात्मक परेशानियों से जूझ रहे लोगों की समस्याओं को गंभीरता से समझने तथा जरूरत पड़ने पर समय रहते सहयोग और उचित मदद उपलब्ध कराने पर जोर दिया।
संगोष्ठी में यह संदेश भी दिया गया कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों को छिपाने या नजरअंदाज करने के बजाय उनके बारे में परिवार, मित्रों और भरोसेमंद लोगों से बातचीत करनी चाहिए। समय पर मिलने वाला सहयोग किसी व्यक्ति को गंभीर कदम उठाने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
स्कूल-कॉलेजों में चलेगा जागरूकता अभियान
आत्महत्या रोकथाम सप्ताह के दौरान रामगढ़ जिले के विभिन्न स्कूलों, कॉलेजों और कोचिंग संस्थानों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके साथ ही कार्यशालाओं और आईईसी गतिविधियों के माध्यम से विशेष रूप से युवाओं को मानसिक स्वास्थ्य, तनाव और अवसाद से संबंधित विषयों के प्रति जागरूक किया जाएगा।
सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर चुप्पी तोड़ना जरूरी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि कोई व्यक्ति मानसिक परेशानी या भावनात्मक संकट से गुजर रहा हो तो उसकी बात को गंभीरता से सुना जाए और उसे समय पर सहयोग दिया जाए। उन्होंने कहा कि संवेदनशीलता और समय पर मदद किसी की जिंदगी बचाने में अहम साबित हो सकती है।