रामगढ़, झारखंड: नगर परिषद रामगढ़ कार्यालय परिसर में उस समय हलचल मच गई जब समाजसेवी रवि कुमार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ आत्मदाह की चेतावनी दे दी। इस चेतावनी के बाद प्रशासन सतर्क हो गया और परिसर में दिन भर सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए।
हालांकि, मंगलवार को नगर परिषद के पदाधिकारियों और रवि कुमार समर्थकों के बीच लंबी वार्ता के बाद मामला शांतिपूर्वक सुलझा। बैठक में रवि कुमार द्वारा लगाए गए आरोपों को गंभीरता से लेते हुए नगर परिषद ने एक सप्ताह के भीतर अधूरी सूचना पूर्ण रूप से उपलब्ध कराने की सहमति दी।
क्या था मामला?
रवि कुमार, निवासी वार्ड संख्या 1, ने 19 जुलाई 2024 को सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नगर परिषद से 6 बिंदुओं पर सूचना मांगी थी। इसके एवज में उनसे ₹15,000 लिए गए थे, परंतु जानकारी अधूरी उपलब्ध कराई गई। रवि का आरोप है कि नगर परिषद ने जानबूझकर भ्रष्टाचार संबंधी सूचनाएं छुपाईं। इससे आहत होकर उन्होंने आत्मदाह की चेतावनी दी और उपायुक्त, एसडीओ, थाना प्रभारी समेत अन्य अधिकारियों को लिखित सूचना भी दी।
प्रशासन हुआ सक्रिय
रवि की चेतावनी मिलते ही पुलिस-प्रशासन सतर्क हो गया। अनुमंडल पदाधिकारी अनुराग तिवारी के निर्देश पर अंचल अधिकारी सुदीप कुमार और प्रखंड के नोडल पदाधिकारी संजय बक्शी मौके पर पहुंचे और नगर परिषद सभागार में दोनों पक्षों के बीच बैठक आयोजित की गई।
बैठक में तय हुआ कि जिन बिंदुओं पर उत्तर नहीं दिया गया है, उनके लिए रवि कुमार नया आवेदन देंगे और नगर परिषद एक सप्ताह के भीतर जवाब उपलब्ध कराएगी। इस सहमति के साथ मामला सुलझ गया और आत्मदाह की आशंका टल गई।
बैठक में शामिल रहे:
बैठक में नगर परिषद के राजीव रंजन प्रसाद, प्रेम प्रकाश, जेएलकेएम के बिहारी महतो, पूर्व विधायक शंकर चौधरी, कमलनाथ महतो, भगवान साव सहित अन्य लोग शामिल थे।