रामगढ़, झारखंड: मरार औद्योगिक क्षेत्र स्थित बिहार फाउंड्री कास्टिंग लिमिटेड (B.F.C.L.) की ओर से फैलाए जा रहे प्रदूषण को लेकर जनता का आक्रोश बढ़ता जा रहा है, लेकिन फैक्ट्री प्रबंधन पर इसका कोई असर नहीं दिख रहा। धूल, धुएं और दुर्गंध से त्रस्त स्थानीय लोग अब धरना और आंदोलन की राह पर उतरने की तैयारी में हैं, जबकि B.F.C.L. बेखौफ होकर उत्पादन जारी रखे हुए है।
दो दिवसीय बैठक, धरना की तैयारी
शुक्रवार और रविवार को गोपीनगर शिव मंदिर में स्थानीय नागरिकों की बैठक हुई, जिसमें फैक्ट्री के खिलाफ विरोध के स्वर और तेज़ करने पर सहमति बनी। उपायुक्त कार्यालय के समक्ष धरना देने का भी निर्णय लिया गया है। लोगों ने कहा कि अब प्रशासन से केवल आश्वासन नहीं, कार्रवाई चाहिए।
धूल, धुआं और दुर्गंध से त्रस्त लोग
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि फैक्ट्री से निकलने वाला काला धुआं, जहरीली गैसें और अब दुर्गंध भी लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन चुकी है। बुजुर्ग, बच्चे और मरीज सबसे अधिक प्रभावित हैं। घरों की दीवारें काली हो रही हैं, और नाक, गले और फेफड़े की बीमारियां लगातार बढ़ रही हैं।
ठंडे बस्ते में चला गया पूर्व उपायुक्त का निर्देश
निवर्तमान उपायुक्त चंदन कुमार के कार्यकाल में B.F.C.L. प्रबंधन के साथ बैठक कर कुछ निर्देश दिए गए थे, लेकिन आज तक उनका कोई कार्यान्वयन नहीं हुआ। जनता का कहना है कि अब तो प्रशासन और राजनीतिक दलों की चुप्पी, सेटिंग और साठगांठ को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
नक्कारखाने में तूती की आवाज़?
स्थानीय निवासी कहते हैं कि हर राजनीतिक दल के कुछ लोग फैक्ट्री प्रबंधन से जुड़े हुए हैं, और यही कारण है कि तमाम विरोध के बावजूद किसी भी स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है। अब लोगों को लगने लगा है कि उनका विरोध भी नक्कारखाने में तूती की आवाज बनकर रह जाएगा।