रामगढ़ (झारखंड), मांडू प्रखंड, कुजू: राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्या डॉ. आशा लकड़ा शुक्रवार को महुआ टुंगरी करमा में अवैध खनन के दौरान हुई दर्दनाक खान हादसे की जानकारी लेने पहुंचीं। उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण कर सुरक्षा चूक और प्रशासनिक लापरवाही को गंभीर बताया।
डॉ. लकड़ा ने कहा कि ग्रामीण पेट की भूख मिटाने के लिए जान जोखिम में डाल रहे हैं, जो अत्यंत चिंताजनक है। उन्होंने मौके पर मौजूद सीसीएल के डायरेक्टर पीएंडपी शंकर नागाचारी से खान की स्थिति पर जानकारी ली और बाद में कुजू क्षेत्रीय जीएम कार्यालय में अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की।
इस दौरान उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि सभी संबंधित एजेंसियां अपनी जिम्मेदारी ठीक से निभातीं, तो चार लोगों की जान समय से पहले नहीं जाती। उन्होंने मुआवजा वितरण में हो रही देरी पर गहरी नाराजगी जताई और रामगढ़ की अपर समाहर्ता कुमारी गीतांजलि को निर्देश दिया कि सभी मृतकों के परिजनों को तत्काल पारिवारिक लाभ और मुआवजा राशि का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने खान क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ करने और अनुसूचित जनजाति परिवारों के प्रति किसी भी प्रकार की लापरवाही या ज्यादती को बर्दाश्त न करने की बात दोहराई।
निरीक्षण और बैठक के दौरान कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे, जिनमें रामगढ़ एसपी अजय कुमार, एसडीपीओ परमेश्वर प्रसाद, मांडू बीडीओ ऋतिक कुमार, सीओ विमल कुमार सिंह, सीसीएल के अन्य वरिष्ठ अधिकारी, और प्रशासनिक पदाधिकारी शामिल थे। डॉ. लकड़ा ने मृतकों के परिवारों से भी मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की और उन्हें हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया।
स्थलीय निरीक्षण के बाद आयोग द्वारा की जा रही पहल से उम्मीद जगी है कि अब पीड़ित परिवारों को शीघ्र राहत मिलेगी और इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सकेगी।