हर-हर गंगे अंतरराष्ट्रीय साझा काव्य संकलन का ऑनलाइन लोकार्पण

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रामगढ, झारखंड : हर-हर गंगे अंतरराष्ट्रीय साझा काव्य-संकलन, ई-बुक का लोकार्पण आभासी मंच पर मॉरीशस के विद्वान साहित्यकार डॉ. सोमदत्त काशीनाथ के कर-कमलों द्वारा किया गया। पुस्तक के संपादक डॉ सुनील परीट, बेंगलुरु, कर्नाटक के वरिष्ठ साहित्यकार हैं और प्रकाशक श्री गुरुदेव प्रकाशन, बेंगलुरु हैं।

कार्यक्रम का आरंभ गंगा आरती के साथ हुआ, जिसे अपने मधुर स्वर में गुजरात के डॉ.बी. जे पटेल ‘ब्रिजेश’ ने गाया। संपादक डॉ सुनील परीट ने उपस्थित सभी अतिथियों का स्वागत किया तथा पुस्तक के विषय में प्रकाश डाला।

मुख्य वक्ता डॉ. शारदा प्रसाद ने पुस्तक की रूपरेखा व संयोजन-संकलन पर प्रकाश डाला। पूरी पुस्तक की विशेषता यह है कि इसमें स्थापित वरिष्ठ लोकप्रिय कवियों की रचनाएं तो है ही साथ ही बाल कवियों व नवोदय कवियों की कविताएं भी संकलित हैं। डॉ. शारदा ने कहा कि इस पुस्तक में युगों- युगों से प्रवाहित पावन-पुनीत गंगा के उद्गम से लेकर सागर में मिलने तक के इतिहास को संजोया-पिरोया गया है।

इस पुस्तक से मानवता का कल्याण तो होगा ही हमारी नदी-संस्कृति और सभ्यता भी संजोयी जाएगी। पुस्तक में भारत के कोने-कोने से कवियों ने तथा वैश्विक स्तर पर मॉरीशस, बुल्गारिया, नेपाल, तंजानिया, पूर्वी यूरोप, पूर्वी अफ्रीका, पोर्ट ऑफ स्पेन, इंग्लैंड, अमेरिका आदि देशों से कवियों-कवयित्रियों ने अपनी कविताएं समर्पित की हैं। धन्यवाद ज्ञापन तथा कुशल मंच संचालन डॉ. सुनील परीट के द्वारा किया गया। सभी कवियों को ई-प्रमाण पत्र भी वितरित किए गए।