नई दिल्ली, शुक्रवार 22 अगस्त 2025 : सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआइआर) को लेकर शुक्रवार को अहम फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि जिन मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से काटे गए हैं, वे अब आधार कार्ड सहित अन्य पहचान पत्रों के आधार पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं। साथ ही, चुनाव आयोग को निर्देश दिया गया है कि वह मतदाता सूची से हटाए गए करीब 65 लाख नामों की पूरी सूची सार्वजनिक करे और नाम कटने का कारण भी स्पष्ट रूप से बताए।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि आधार और एपीक (मतदाता पहचान पत्र) को वैध पहचान पत्र के रूप में स्वीकार किया जाएगा । लेकिन इसके साथ उचित सत्यापन की प्रक्रिया अनिवार्य होगी। अदालत ने इस आदेश को “वोटर-फ्रेंडली” बताते हुए मतदाताओं को राहत दी और कहा कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना जरूरी है।
पृष्ठभूमि :
यह आदेश बिहार SIR विवाद पर सुनवाई के बाद आया है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम बिना उचित कारण हटा दिए गए। विपक्षी दलों और याचिकाकर्ताओं ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया था। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को विपक्ष और याचिकाकर्ताओं ने “एक बड़ा कदम आगे” करार दिया है।