नई दिल्ली : राउज एवेन्यू अदालत ने इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (आईआरसीटीसी) घोटाले से जुड़े मामले में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और पुत्र तेजस्वी यादव के खिलाफ आरोप तय करने की अनुमति दे दी है। अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने लालू यादव पर भ्रष्टाचार से जुड़े गंभीर आरोप लगाए हैं और जांच में ऐसे साक्ष्य मिले हैं जिनके आधार पर आरोप तय किए जा सकते हैं।
मुख्य बातें
राउज एवेन्यू अदालत ने अलग-अलग आरोपों के तहत सभी आरोपियों के खिलाफ मुकदमे की प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया।
राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव पर धोखाधड़ी और साजिश रचने के आरोप भारतीय दंड संहिता (धारा 420 और 120बी) के तहत तय किए गए हैं।
सीबीआई का कहना है कि उसके पास आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं, जबकि लालू प्रसाद यादव के वकील का तर्क है कि मुकदमे को जारी रखने का कोई वैधानिक आधार नहीं है।
अदालत का यह फैसला बिहार विधानसभा चुनाव से पहले लालू परिवार के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
क्या हैं आरोप ?
आरोप है कि आईआरसीटीसी से जुड़े कुछ होटलों के रखरखाव के ठेके कथित रूप से लालू यादव से जुड़ी एक बेनामी कंपनी को तीन एकड़ जमीन के बदले दिए गए। सीबीआई का कहना है कि यह सौदा भ्रष्टाचार और साजिश के तहत किया गया था। अदालत ने सीबीआई की दलीलों को देखते हुए संबंधित धाराओं में आरोप तय किए हैं।
पिछला घटनाक्रम
7 जुलाई 2017 को सीबीआई ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर पटना, नई दिल्ली, रांची (झारखंड) और गुरुग्राम स्थित 12 ठिकानों पर छापेमारी की थी। तब से जांच जारी थी और आज अदालत ने आरोप तय कर मुकदमे की औपचारिक प्रक्रिया शुरू करने का मार्ग प्रशस्त कर दिया है।
आरोपियों का पक्ष
आरोप तय होने के बाद लालू प्रसाद यादव ने कहा कि वे निर्दोष हैं और उन्हें झूठा फंसाया जा रहा है। राबड़ी देवी ने भी कहा कि उनका किसी भी प्रकार की साजिश या धोखाधड़ी से कोई लेना-देना नहीं है।
राजनीतिक असर
यह फैसला बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले आया है, जिससे राज्य की राजनीति में हलचल बढ़ना तय माना जा रहा है। विपक्ष और सत्ताधारी दल दोनों इस मुद्दे को चुनावी बहस में प्रमुखता से उठा सकते हैं।
साभार : डीएएस दिल्ली