रामगढ़, झारखंड : धर्म और अध्यात्म की पावन भूमि रामगढ़ इन दिनों भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर है। शिवाजी रोड स्थित श्री बांके बिहारी राधा रानी किला मंदिर में चल रहा 62वां सतचंडी एवं श्रीरामचरितमानस नवाह्परायण महायज्ञ पूरे नगर को आस्था की ज्योति से आलोकित कर रहा है।
यह संयुक्त महायज्ञ 27 अक्टूबर को मंगल ध्वनि, वेद मंत्रों और श्रीगणेश पूजन के साथ प्रारंभ हुआ था, जो 5 नवंबर को हवन, पूर्णाहुति और अटूट भंडारे के साथ संपन्न होगा। आयोजन किला मंदिर प्रबंध समिति के तत्वावधान में किया जा रहा है। सन 1963 में आरंभ हुई यह परंपरा आज भी बिना अवरोध निरंतर चल रही है, जो रामगढ़ की सांस्कृतिक और धार्मिक आत्मा का जीवंत प्रतीक बन चुकी है।
महायज्ञ के आचार्य एवं मंदिर के प्रधान पुजारी पंडित गोविंद बल्लभ शर्मा शास्त्री हैं, जबकि आशीष अग्रवाल एवं उनकी धर्मपत्नी यजमान की भूमिका निभा रहे हैं। पंडित मुरारी मोहन शर्मा ब्रह्मा के रूप में प्रतिष्ठित हैं।
मंदिर परिसर में सुबह से लेकर देर शाम तक घंटा-घड़ियालों की मधुर ध्वनि और वेद मंत्रों की गूंज वातावरण को भक्तिमय बना रही है। दस विद्वान ब्राह्मण — पंडित रविंद्र पांडेय (मानस व्यास), राजकिशोर पाठक, रासबिहारी पांडेय, राजू पाठक, संजय पाठक, चंदन पाठक, राजन पांडेय, ब्रजेश पाठक और सत्येंद्र दूबे — मिलकर सतचंडी पाठ एवं श्रीरामचरितमानस नवाह्परायण का अखंड पाठ कर रहे हैं।
प्रत्येक दिन श्रीगणेश पूजन, सर्ववेदी पूजन, सतचंडी पाठ और श्रीरामचरित्र नवाह्परायण का आयोजन किया जा रहा है। श्रद्धालु मंदिर की परिक्रमा करते हुए पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं।
आचार्य पंडित गोविंद बल्लभ शर्मा शास्त्री ने कहा —
“यह महायज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज को सदाचार, सद्भाव और आध्यात्मिकता के मार्ग पर अग्रसर करने का माध्यम है। जब तक मानवता और श्रद्धा साथ हैं, तब तक यज्ञ का वास्तविक उद्देश्य साकार होता रहेगा।”