रजरप्पा थाना क्षेत्र के भुचुंगडीहमें अवैध कोयला खदान में लगी आग बुझाने के दौरान मंगलवार को मजदूर रविंद्र महतो अचानक जमीन धंसने से आग में समा गया। इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर ऐसी खतरनाक जगह पर बिना किसी सुरक्षा इंतजाम के मजदूरों को काम पर क्यों लगाया गया। क्या मजदूरों की जान इतनी सस्ती हो गई है कि उन्हें मौत के मुंह में धकेल दिया जाए। इस घटना के बाद से रवींद्र की पत्नी मीरा देवी का रो.रोकर बुरा हाल है और वह बार.बार बेहोश हो रही हैं। गांव में मातम पसरा हुआ है। वहीं ग्रामीणों में प्रशासन, पुलिस, सीसीएल के खिलाफ भारी नाराजगी है। घटना के बाद ग्रामीणों ने और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की थी।
घटना का जिम्मेवार कौन ?
मजदूर के आग में समा जाने के बाद अब यह सवाल लोगों के बीच चर्चा में हैं कि इस घटना का आखिर दोषी कौन है। लोगों के बीच यह सवाल कौंध रहा है कि इस घटना का दोषी प्रशासन, सीसीएल, वन विभाग या कोयला तस्कर हैं। पूर्व में अवैध कोयला खनन कर कोयला तस्करों द्वारा जो गड्ढा छोड़ा गया था। उसमें कुछ दिनों पूर्व भीषण आग लग गयी थी। इसे बुझााने की जिम्मेवारी प्रशासन द्वारा सीसीएल को दी गयी थी। सीसीएल ने आग बुझाने के लिए ठेकेदार को जिम्मेवारी दी तथा ठेकेदार द्वारा काम करवाने के क्रम में एक मजदूर की जमीन धंसने से मौत हो गयी। जिस जगह आग लगी वन विभाग की भूमि है। वर्षों पूर्व एक चर्चित कोयला तस्कर द्वारा यहां से बड़े पैमाने पर कोयला उत्खनन करवाया जाता था। वर्षाें पूर्व यहां एक प्रशिक्षु आइपीएस के नेतृत्व में छापामारी करने गये पुलिस दल पर कोयला खनन करने वालों ने हमला कर दिया था तथा यह क्षेत्र चर्चा में आया था। अब यह सवाल उठता है कि सरकारी भूमि पर लगी आग को बुझाने के लिए तथा आग में एक मजदूर के जल जाने का जिम्मेवार किसे ठहराया जाय। सवाल उठता है कि सरकारी भूमि पर लगे आग को बुझाने के लिए समय रहते कदम क्यों नहीं उठाया गया
गांव वालों का आरोप: पहले ही दी थी आग की सूचना
ग्रामीणों का कहना है कि खदान में आग लगने की जानकारी पहले ही दी गई थी कोई ठोस कदम नहीं उठाया। न तो आग बुझाने की पूरी तैयारी थी, न ही मजदूरों के लिए कोई सेफ्टी गियर उपलब्ध कराया गया। यह हादसा अक्षम और गैर-जिम्मेदाराना रवैये का नतीजा है।
रेस्क्यू अभियान बना मजाक
घटना के कई घंटे बीत जाने के बाद भी रवींद्र का कुछ पता नहीं चला है। रेस्क्यू टीमों की धीमी गति और सीमित संसाधनों ने भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह हादसा टाला जा सकता था, अगर समय रहते सही कदम उठाए गए होते? हर हादसे के बाद जांच और मुआवज़े की बात होती है, लेकिन ज़मीनी हकीकत नहीं बदलती। मजदूर आज भी जान जोखिम में डालकर काम कर रहे हैं, और सिस्टम आंख मूंदे बैठा है।
क्या सीसीएल को जबरन आग बुझाने की जिम्मेवारी दी गयी थी ?
वन विभाग की भूमि पर अवैध कोयला खनन के बाद बने गड्ढे में कोयले में लगी भीषण आग को बुझाने की जिम्मेवारी किसकी थी। बताया जाता है कि आग की बात सामने आने पर प्रशासन द्वारा सीसीएल को आग बुझाने की जिम्मेवारी दी। यह बात चर्चा में आ रही है कि प्रशासन द्वारा जबरन आग बुझाने की जिम्मेवारी सीसीएल को दी गयी थी। सीसीएल के एक अधिकारी ने नाम उजागर न करने की शर्त पर कहा कि सीसीएल को कहा गया था कि आग बुझाने का कार्य करें। नहीं करने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हालाकि प्रशासन ने इस बात से इनकार किया और अरोप को गलत बताया है।
आपका क्या कहना है
👉 क्या भुचुंगडीह जैसे हादसों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कभी कार्रवाई होगी ?
👉 क्या अवैध खनन पर अब भी लगाम लग पाएगी या ऐसे हादसे बार-बार दोहराए जाएंगे ?
👉 क्या मजदूरों की जान की कीमत कोई समझेगा ?
इस घटना ने न सिर्फ एक परिवार को उजाड़ा, बल्कि सरकारी और कॉर्पोरेट तंत्र की नाकामी को फिर से उजागर कर दिया है। अब वक्त है सवाल पूछने का और जवाब मांगने का।