रामगढ़ शहर के एक के बाद एक तालाब गंदगी और नालों के गंदे पानी के बोझ तले कराह रहे हैं। शहर के प्रमुख तालाबों में वर्षों से नालियों का गंदा पानी और ठोस कचरा बिना किसी रोक-टोक के गिरता आ रहा है। नालियों की सफाई केवल सतही तौर पर होती है—ऊपरी प्लास्टिक निकाला जाता है, पर जमी गंदगी जस की तस पड़ी रहती है।
डीसीचंदनकुमारकाकदमसराहनीय, लेकिनक्याहैपूरीतस्वीर?
जिला उपायुक्त चंदन कुमार ने हाल ही में “तालाब बचाओ अभियान” के तहत शहर के सभी प्रमुख तालाबों का निरीक्षण कर अतिक्रमणहटानेऔरतालाबोंकीसफाई के निर्देश दिए हैं। सतकौड़ी कॉम्प्लेक्स के समीप स्थित तालाब की सफाई के लिए ₹2 लाखकीराशिडीएमएफटीफंडसे स्वीकृत की गई है और छावनी परिषद को कार्यकारी एजेंसी नियुक्त किया गया है।
शहरवासियों ने इस पहल का स्वागत तो किया है, पर एक बड़ा सवाल अब भी हवा में तैर रहा है – “सिर्फतालाबकीसफाईसेक्याहोगा, जबहरदिनउनमेंगंदेनालेगिररहेहैं?”
नालियोंकीबदहालीबनीबड़ीचुनौती
रामगढ़ की अधिकांश नालियां वर्षों से जाम हैं। पुराने नालों को ऊंचा कर ईंटें जोड़ी गईं, लेकिन उनकी चौड़ाई नहीं बढ़ाई गई। आबादी और मकानों की संख्या में हुई भारी वृद्धि के बावजूद नालियों के उन्नयन पर कोई ठोस कार्य नहीं हुआ। परिणामस्वरूप हल्की बारिश में भी गंदा पानी सड़कों पर बहता है, और आखिरकार तालाबों में जाकर गिरता है।
प्रमुखतालाबोंकीस्थितिचिंताजनक
मनोहर रेसिडेंसी के पास स्थित तालाब में पंजाबी मोहल्ले से आने वाला गंदा पानी और कचरा सीधा गिरता है।
सतकौड़ी कॉम्प्लेक्स तालाब भी इस गंदगी का शिकार है।
बिजुलिया तालाब तक को नहीं बख्शा गया – इसके आसपास के घरों से सीधे गंदा पानी तालाब में डाला जा रहा है।
क्याहोनाचाहिएअगलाकदम?
केवल तालाब की सफाई से समाधान नहीं निकलेगा, जब तक कि नालियों के गंदे पानी की निकासी की एक स्थायी, वैज्ञानिकऔरव्यावहारिकव्यवस्था नहीं की जाती। डीसी चंदन कुमार को चाहिए कि वे छावनी परिषद को तालाबों में गिरने वाले गंदे पानी और कचरे पर प्रभावीरोकलगानेकेस्पष्टनिर्देश दें।
निष्कर्ष:
तालाब हमारी सांस्कृतिक धरोहर हैं, जीवनदायिनी जल स्रोत हैं। यदि इन्हें यूं ही नालों का अंतिम ठिकाना बना दिया गया, तो आने वाली पीढ़ियों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। प्रशासन की पहल स्वागतयोग्य है, पर यह तब तक अधूरी है जब तक समग्रसमाधान की दिशा में कदम न उठाए जाएं।