नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार 19 अगस्त 2025 को झारखंड के पुलिस महानिदेशक (DGP) अनुराग गुप्ता की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की। चीफ जस्टिस बी.आर. गवई, जस्टिस के. विनोद चंद्रन और जस्टिस एन.वी. अनजारिया की पीठ ने इस मामले में बाबूलाल मरांडी की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया, जिससे अनुराग गुप्ता को बड़ी राहत मिली है।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अपना पक्ष रखते हुए अदालत को बताया कि DGP की नियुक्ति पूरी तरह राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आती है और यह नियुक्ति सभी नियमों और प्रक्रियाओं के अनुरूप की गई है। उन्होंने यह भी दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट के पहले के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए ही राज्य सरकार ने अनुराग गुप्ता को पद पर नियुक्त किया है।
याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि नियुक्ति प्रक्रिया में यूपीएससी के पैनल पर विचार नहीं किया गया और यह सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन है। हालांकि पीठ ने इन तर्कों को अस्वीकार करते हुए कहा कि ऐसा कोई उल्लंघन प्रतीत नहीं होता।
क्या कहा कोर्ट ने
कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि राज्य सरकार द्वारा रखे गए तथ्यों से यह स्पष्ट होता है कि नियुक्ति प्रक्रिया पारदर्शी रही।
साथ ही अवमानना संबंधी आरोपों को “गैर-उचित” बताते हुए याचिका को रद्द कर दिया।
राज्य सरकार को मिली राहत
इस फैसले को राज्य सरकार और डीजीपी अनुराग गुप्ता दोनों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। कोर्ट की टिप्पणी के बाद यह लगभग तय है कि वर्तमान डीजीपी के कार्यकाल पर किसी प्रकार का तत्कालिक खतरा नहीं है।