पुलिस व यातायात पुलिस रामगढ़ में झारखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आदेश के पालन के लिए करेगी प्रयास ? , उच्च न्यायालय के आदेश के पालन में सक्रिय नहीं है रामगढ़ पुलिस व यातायात पुलिस
पुलिस व यातायात पुलिस रामगढ़ में झारखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आदेश के पालन के लिए करेगी प्रयास ? , उच्च न्यायालय के आदेश के पालन में सक्रिय नहीं है रामगढ़ पुलिस व यातायात पुलिस
रामगढ़, झारखंड : झारखंड राज्य प्रदूषण बोर्ड ने ध्वनी प्रदूषण को लेकर काफी कड़े आदेश पारित करते हुये कई दिशा निर्देश जारी किये गये हैं। लेकिन सवाल है कि इन आदेशों को लागू कराने की जिम्मेवारी जिन पर है। वे आदेश पारित कराने में उदासीन हैं। पुलिस, यातायात पुलिस व प्रशासन झारखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आदेश को कौन कहे ये झारखंड उच्च न्यायालय के आदेशों व निर्देशों को लागू कराने में उदासीन है। इसमें भी अगर बात की जाय रामगढ़ पुलिस, रामगढ़ यातायात पुलिस तथा रामगढ़ प्रशासन की तो यहां ये पूरी तरह से अपने मन के मुताबिक कार्य कर रहे हैं। झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दो पहिया वाहनों के बदल कर अधिक आवाज करने वाले लगाये जाने वाले साइलेंसर पर, प्रेशर हॉर्न आदि पर कार्रवाई करने का आदेश दिया है। ये कानून पहले से है, लेकिन कभी बदले गये आवाज करने वाले साइलेंसर पर कार्रवाई नहीं की गयी है। रामगढ़ में केवल खानापूर्ति कर फाइन वसूली का टारगेट पूरा किया जाता है तथा इसके आड़ में अवैध वसूली की जाती है।
उच्च न्यायालय के आदेश के पालन के लिए भी सक्रिय नहीं है पुलिस प्रशासन
अगस्त माह में झारखंड उच्च न्यायालय ने वाहनों पर लगने वाले विभिन्नि राजैनैतिक दलों के झंडे तथा वाहनों पर लगाये जाने वाले नेम प्लेट को लेकर आदेश पारित किया है। लेकिन रामगढ़ में इसके पालन के दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हुई। दरअसल जिन पर इन आदेशों के पालन की जिम्मेवारी है। उन्हीं के वाहनों में अधिकृत नहीं होने के बावजूद नेम प्लेट लगा देखा जा सकता है। जिला के कई थाना प्रभारियों को अपने वाहन में नेम प्लेट लगा कर चलते देखा जा सकता है। झारखंड सरकार ने नियम बना रखा है कि कौन अपने वाहन में नेम प्लेट लगायेगा तथा किस रंग के नेम प्लेट लगायेगा । लेकिन रामगढ़ में इस नियम की भी अवहेलना की जा रही है। झारखंड सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार जेपीएससी स्तर के अधिकारी नीले बोर्ड पर पदनाम वाले नेम प्लेट लगा सकते हैं। लेकिन रामगढ़ में एक पुलिस अधिकारी जो जेपीएससी स्तर के अधिकारी नहीं है। वे भी नीले रंग का नेम प्लेट अपने वाहन में लगा रखा है। इसे देखने वाला कोई नहीं है। जिला भर में सैकड़ों वाहन पर विभिन्न राजनैतिक दलों के झंडे व पदनाम वाले नेम प्लेट लगे वाहन चल रहे हैं। जो झारखंड उच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना है। लेकिन इसे रामगढ में देखने वाला कोई नहीं है।
झारखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का आदेश
रांची : राज्य में बढ़ते शोर-शराबे पर लगाम लगाने के लिए झारखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। बोर्ड ने साफ कहा है कि अब किसी भी वाहन में प्रेशर हॉर्न, मल्टी-टोन हॉर्न, म्यूजिकल हॉर्न और बदले हुए (कस्टमाइज्ड/मॉडिफाइड) साइलेंसर का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित है। बोर्ड के सदस्य सचिव राजीव लोचन बक्शी की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि इन उपकरणों का उपयोग न केवल आम जनता के लिए असुविधा का कारण है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 का भी उल्लंघन है।
मुख्य प्रावधान
रात 10 बजे के बाद डीजे, लाउडस्पीकर और म्यूजिक सिस्टम का प्रयोग सख्ती से वर्जित, सभी सरकारी एजेंसियों को ऐसे हॉर्न और साइलेंसर तुरंत जब्त करने और हटाने का निर्देश, नियम तोड़ने वालों पर जुर्माना, वाहन जब्ती और लाइसेंस रद्द करने तक की कार्रवाई संभव,सार्वजनिक परिवहन और स्कूल बसों में ध्वनि प्रदूषण फैलाने पर अतिरिक्त दंडात्मक कार्रवाई होगी।
कानूनी स्थिति
कंपनी द्वारा दिए गए मानक उपकरणों से छेड़छाड़ करना गैरकानूनी, प्रेशर हॉर्न और मॉडिफाइड साइलेंसर लगाने वाले वाहन मालिक व चालक दोनों जिम्मेदार होंगे।
शोर सीमा (डेसीबल में)
औद्योगिक क्षेत्र : दिन – 75, रात – 70, वाणिज्यिक क्षेत्र : दिन – 65, रात – 55, आवासीय क्षेत्र : दिन – 55, रात – 45, साइलेंस ज़ोन : दिन – 50, रात – 40