उच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त अधिकारी के विरोध के बावजूद घेराबंदी कर ली गयी आईएजी ग्लास फैक्ट्री के जमीन की, पुलिस प्रशासन व जिला प्रशासन ने नहीं किया सहयोग

Spread the love

भदानीगर (रामगढ़), झारखंड :  रामगढ़ जिला के पतरातू प्रखंड के भदानीनगर स्थित आएजी ग्लास फैक्ट्री काफी लंबे समय से बंद पड़ी है। यहां काम करने वालों के पीएफ ग्रेच्यूटी आदि के पैसे आज तक फंसे हुये है। फैक्ट्री के लिक्वीडेशन (किसी व्यवसाय को बंद करने व उसके मूल्यवान वस्तुओं को दावा करने वाले बैंक व व्यक्तियों के बीच वितरित करना) प्रक्रिया कोलकाता उच्च न्यायालय की देख रेख में जारी है। कोलकाता उच्च न्यायालय ने फैक्ट्री के कानूनी बंदी के लिए अधिकारियों की नियुक्ति कर रखी है तथा कोलकाता उच्च न्यायायल में इसकी सुनवायी हो रही है। लेकिन अब फैक्ट्री की जमीन पर भूमि माफियाओं व दबंग लोगों की नजर पड़ गयी है तथा वे फैक्ट्री जमीन लूटने पर पड़ गये हैं। हाल के दिनों में फैक्ट्री की एक एकड़ 17 डिस्मिल जमीन की जबरन घेराबंदी कर ली गयी। दिखावे के लिए कुछ स्थानीय लोग घेराबंदी में सामने थे। लेकिन इस सारे खेल के पीछे जिला की एक दंबंग जोड़ी काम कर रही है। इस जोड़ी के हाथों में जिला का चारकोल, कोयला, अवैध कोयला, रैक लोडिंग आदि व्यवसाय है। इस जोड़ी ने काफी कम समय में जिला में कीमती परिसंपत्तियों के भारी खरीद की है। आश्चर्य जनक तथ्य यह है कि कोलकाता उच्च न्यायालय के फैक्ट्री के लिए नियुक्त असिस्टेंट ऑफिसियल लिक्वीडेटर द्वारा स्थानीय पुलिस, जिला पुलिस व जिला प्रशासन के अधिकारियों को लिखित सूचना देने के बाद भी इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुयी। साथ ही क्या पक्ष क्या विपक्ष हर दल के लोग इस मामले में चुप्पी साध रखी है तथा कुछ भी नहीं कहते हैं। जबकि क्षेत्र में राजनैतिक सक्रियता काफी अधिक है।वहीं दूसरी ओर तिल का ताड़ बना देने वाली क्षेत्र की मीडिया भी पूरी तरह से इस मामले में चुप है। जो आश्चर्य जनक है। इस बात की चर्चा है कि जमीन की घेराबंदी करने वालों ने सबों को साध रखा है।

पुलिस को तथा उपायुक्त को दिया गया आवेदन, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई

जमीन को एक सोची समझी साजिस के तहत आइएजी फैक्ट्री के जमीन की लूट की गयी। यह जमीन आइएजी फैक्ट्री का बालू यार्ड था। पहले यहां एक कंटेनर लाकर रखा गया। इसके बाद जमीन की घेराबंदी प्रारंभ की गयी। घेराबंदी में देर न हो इसलिए ईंट की दीवार न देकर पीसीसी स्लैब व पीसीसी पिलर के माध्यम से चहारदीवारी कर गेट लगा दिया गया। सर्वप्रथम 15 जुलाई 2025 को स्थानीय ओपी में असिस्टेंट ऑफिसियल लिक्वीडेटर ने आवेदन देकर आइएजी फैक्ट्री की जमीन को घेराबंदी किये जाने की सूचना दी। इसके बाद फिर 29 जुलाई 2025 को इसकी सूचना दी गयी। लेकिन घेराबंदी रोके जाने के लिए कोई कार्रवाई स्थानीय पुलिस द्वारा नहीं की गयी। इसके बाद नौ सितंबर एसपी को आवेदन देकर स्थानीय पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई न किये जाने की तथा इस मामले में आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की गयी ।लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। इस वक्त कहा गया कि जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन दिशोम गुरु शिबू सोरेन के श्राद्ध में व्यवस्था को लेकर जुटा है। श्राद्ध होने के बाद इस मामले को देखा जाएगा। लेकिन आज तक इस मामले में कुछ नहीं हुआ तथा आराम से जमीन की चहारदीवारी कर गेट लगा दिया गया। साथ ही काफी तेजी के साथा आनन फानन में जमीन में विद्युत कनेक्शन देते हुये मीटर भी बैठा दिया गया। जबकि आम लोगों को कनेक्शन के लिए महीनों विद्युत विभाग की दौड़ लगानी पड़ती है।

असिस्टेंट ऑफिसियल लिक्वीडेटर ने उपायुक्त को दिया आवेदन

जमीन की घेराबंदी किये जाने की सूचना दिये जाने पर भी पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई नहीं होने पर कोलकाता उच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त असिस्टेंट ऑफिसियल लिक्वीडेटर ने 11 अगस्त को रामगढ़ के उपायुक्त को एक पत्र दिया। जिसमें लिखा गया है कि कोलकाता उच्च न्यायालय में आइएजी कंपनी के लिक्वीडेशन की प्रक्रिया चल रही है। जिसके तहत सिक्यूरीटी ऐजेंसी तैनात की गयी है। सिक्यूरिटी एजेंसी ने सूचना दी है कि कुछ लोग कंपनी की जमीन को घेर रहे हैं। जबकि जमीन कोलकाता उच्च न्यायालय के अधीन है तथा पंजाब नेशनल बैंक व स्टेट बैंक में बंधक है। उपायुक्त से अनुरोध किया गया है कि जमीन से अवैध निर्माण व अतिक्रमण हटाया जाय। आवेदन की प्रतिलिपि रामगढ़ एसपी, सीओ, स्टेट बैंक व पंजाब नेशनल बैंक के अधिकारी को भी प्रेषित की गयी है। लेकिन आज तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई।

मामले के पीछे आइएजी कंपनी का एक पूर्व कर्मचारी

बताया जा रहा है कि इस मामले के पीछे फैक्ट्री का एक पूर्व कर्मचारी है। प्रारंभ के दिनों में कंपनी ने एक कर्मचारी को जमीन आदि का मामला देखने को रखा था। उक्त कर्मचारी कंपनी के फैक्ट्री की जमीन को अंचल तथा हजारीबाग कार्यालय व न्यायालय में देखता था। बताया जा रहा कि उक्त कर्मचारी ने फर्जीवाड़ा कर कुछ कागजात जमीन के बनवा लिये थे। वर्तमान में उसी कर्मचारी के परिजनों ने कुछ कागजात दबंगो व भूमि माफियाओं को दिया। जिसके जरिये आनन फानन में जमीन में कब्जा कर लिया गया।

कर्मचारियों ने विधायक को कब्जा के खिलाफ दिया प़त्र

क्षेत्र में रह रहे फैक्ट्री के पूर्व कर्मियों ने जमीन के अवैध कब्जा को लेकर बड़कागांव के विधायक रोशन लाल चौधरी के पास शिकायत की थी। विघायक ने उपायुक्त को प़त्र देकर कार्रवाई कर कब्जा हटाने की मांग की थी। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

मायूस हैं फैक्ट्री के पूर्व कर्मी

फैक्ट्री के पूर्व कर्मियों का पीएफ, ग्रेच्यूटी आदि रुका पड़ा है। लिक्विडेशन में उन्हें उम्मीद थी कि कोलकाता उच्च न्यायालय के आदेश से फैक्ट्री किसी को सेटल होने पर उनका पीएफ, गेच्यूटी आदि कोर्ट के आदेश से रिलीज होगा। लेकिन अगर घोषित संपत्ति में लूट होती है तो लिक्वीडेशन पक्रिया में रुकावट आयेगी तथा उनका पीएफ व ग्रेच्यूटी का पैसा नहीं मिलेगा। इससे फैक्ट्री के पूर्व कर्मियों में मायूसी का माहौल है।

 

घेरा गया जमीन