हजारों की संख्या में जुट कर आदिवासी समाज के लोगों ने कुड़मियों को एसटी का दर्जा दिये जाने की मांग का किया विरोध

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रामगढ़, झारखंड : कुडमी समाज द्वारा एसटी वर्ग में शामिल किए जाने की मांग और हालिया रेल टेका ठहर छेका आंदोलन के विरोध में बुधवार को आदिवासी समाज ने रामगढ़ में जोरदार शक्ति प्रदर्शन किया। जिले के विभिन्न हिस्सों से भारी संख्या में लोग सिद्धू कान्हू फुटबॉल ग्राउंड में जुटे और वहां से जुलूस की शक्ल में उपायुक्त कार्यालय तक पैदल मार्च किया। इस दौरान कुछ समय के लिए शहर का यातायात भी प्रभावित हुआ। जुलूस में बड़ी संख्या में आदिवासी समाज की महिलायें भी शामिल थीं । आदिवासी संगठनों ने कहा कि कुडमी समाज को एसटी वर्ग में शामिल करने की मांग असंवैधानिक है और इसका कड़ा विरोध किया जाएगा। उन्होंने इसे विफल करने के लिए व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाने का ऐलान किया। साथ ही आदिवासी समाज का एक प्रतिनिधि मंडल ने उपायुक्त के माध्यम से एक ज्ञापन केंद्र सरकार को प्रेषित किया। जिसमें कुड़मियों के मांग को असंवैधानिक बताया गया है।

पृष्ठभूमि

हाल ही में कुडमी समाज ने पूरे राज्य में रेल टेका दहर छेका आंदोलन कर रेल परिचालन ठप कर दिया था। इस आंदोलन में कई विधायक और सांसद शामिल हुए थे। इसके साथ ही 43 विधायकों ने केंद्र सरकार को संयुक्त पत्र सौंपकर कुडमी समाज को एसटी वर्ग में शामिल करने और कुडमाली भाषा को मान्यता देने की मांग की थी। लोकसभा में भी कई सांसद इस मुद्दे को उठा चुके हैं।

समाज में बढ़ता मतभेद

कुडमी समाज की मांगों का आदिवासी संगठनों द्वारा लगातार विरोध किए जाने से समाज दो भागों में बंटता हुआ दिख रहा है। कई स्थानों पर तनाव की स्थिति बनी है। यहां तक कि दुर्गा पूजा जैसे आयोजनों में भी आदिवासी समाज के लोग कुडमी समाज के कार्यक्रमों में सहयोग देने से इंकार कर रहे हैं।

जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते दोनों समाजों के बीच मतभेद को दूर करने की पहल नहीं की गई तो समाज में स्थायी विभाजन की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।