क्या बरस पाएगा आसमान से अमृत प्रदूषण की मार झेल रहे रामगढ़ जिला में ?

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नीरज अमिताभ 

रामगढ़ (झारखंड) : सोमवार, 6 अक्टूबर 2025 को शरद पूर्णिमा का पर्व पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इसी दिन कोजागरी लक्ष्मी पूजा का भी आयोजन किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात को आसमान से अमृत की वर्षा होती है। इस दिन लोग खीर बनाकर खुले आसमान के नीचे रखते हैं ताकि उसमें अमृत के कण समा जाएं। सुबह उस खीर को प्रसाद के रूप में ग्रहण करने से सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य प्राप्त होता है — ऐसी आस्था है।

लेकिन इस बार रामगढ़ जिले में एक गंभीर प्रश्न लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या प्रदूषण की चादर तले यह अमृत वर्षा रामगढ शहर व रामगढ जिले में हो पाएगी ?

रामगढ़ जिला लंबे समय से वायु और ध्वनि प्रदूषण की चपेट में है। यहां स्थापित लौह उद्योगों और अन्य फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआं और धूलकण वातावरण को लगातार प्रदूषित कर रहे हैं। कागजों पर तो अधिकांश फैक्ट्रियों में प्रदूषण नियंत्रण यंत्र लगे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि खर्च बचाने के लिए उन्हें चलाया ही नहीं जाता। प्रशासनिक स्तर पर भी इस समस्या को लेकर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। आश्चर्य जनक बात यह है कि विभिन्न राजनैतकि दल व चुने गये जनप्रतिनिधि भी इस पर मौन हैं ।

हाल ही में शहर के आसपास स्थित एक फैक्ट्री के खिलाफ स्थानीय नागरिकों, खासकर महिलाओं ने व्यापक आंदोलन किया था। लेकिन समय के साथ वह आंदोलन भी ठंडा पड़ गया और प्रदूषण का स्तर जस का तस बना हुआ है। कई बार रामगढ़ छावनी परिषद तथा सैन्य छावनी की ओर से मंत्रालय को शिकायत भेजी गई, मगर अब तक कोई ठोस परिणाम नहीं निकला।

अब हालात यह हैं कि रामगढ़ के लोग प्रदूषण के साथ जीने को मजबूर हैं।  लोग खुले में खीर रखने से कतराने लगे हैं। कुछ लोग मजबूरी में शेड या जाली के नीचे खीर रखकर परंपरा निभा रहे हैं। रांची रोड और आस-पास के इलाकों में धूलकणों व प्रदूषण की परत इतनी अधिक है कि लोग खुले में खीर नहीं रख पाएंगे ।

प्रदूषण न केवल स्वास्थ्य के लिए घातक बन चुका है, बल्कि अब यह धार्मिक परंपराओं पर भी भारी पड़ रहा है। लोगों के मन में यह सवाल गूंज रहा है —क्या कभी रामगढ़ जिला प्रदूषण की इस चादर से मुक्त होकर फिर से स्वच्छ हवा में सांस ले पाएगा ?