नई दिल्ली : झारखंड की राजधानी रांची के पूर्व उपायुक्त (DC) और आईएएस अधिकारी छवि रंजन को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय ने भूमि घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उन्हें सशर्त जमानत प्रदान की है।
क्या है मामला
यह मामला रांची के बरगाई सर्किल अंतर्गत बड़ियातू स्थित उस जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़ा है, जो भारतीय सेना के कब्जे में थी। आरोप है कि इस जमीन को फर्जी कागजात के सहारे खरीद-बेच कर करोड़ों रुपये का घोटाला किया गया।
कब और कैसे शुरू हुआ मामला
ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) ने 4 मई 2023 को छवि रंजन को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के समय वे समाज कल्याण विभाग में पदस्थापित थे। गिरफ्तारी के बाद से वे न्यायिक हिरासत में थे।
इससे पहले झारखंड हाईकोर्ट ने 6 अगस्त को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
छवि रंजन की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमल्या बागची की खंडपीठ ने सुनवाई की। दोनों न्यायाधीशों ने मामले की परिस्थितियों को देखते हुए उन्हें कुछ शर्तों के साथ जमानत देने का आदेश दिया।
ईडी की जांच और छापेमारी
ईडी ने 13 अप्रैल 2023 को झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल में छवि रंजन से जुड़े 21 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की थी। जांच में यह सामने आया था कि एक संगठित गिरोह फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकारी भूमि की खरीद-बिक्री में शामिल था। इसी गिरोह से छवि रंजन के संपर्क की बात भी सामने आई थी।
अन्य आरोपी भी शामिल
इस प्रकरण में ईडी ने छवि रंजन के साथ-साथ कई अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया है। इनमें कारोबारी विष्णु अग्रवाल, बरगाई अंचल के राजस्व उपनिरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद, प्रदीप बागची, जमीन कारोबारी अफसर अली, इम्तियाज खान, तल्हा खान, फैयाज खान, मोहम्मद सद्दाम, अमित अग्रवाल और दिलीप घोष शामिल हैं।
छवि रंजन का कार्यकाल
छवि रंजन 15 जुलाई 2020 से 11 जुलाई 2022 तक रांची के उपायुक्त रहे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब छवि रंजन को जेल से रिहाई की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
साभार: डीएएस दिल्ली