रामगढ़ : रजरप्पा स्थित मां छिन्नमस्तिका मंदिर में दीपावली की रात उमड़ा जनसैलाब, साधकों ने की विशेष साधना

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दीपावली की रात मां छिन्न मस्तिका मंदिर में लगी श्रद्धालुओं की भीड़

पुजारी सुबोध पंडा

रामगढ़, झारखंड : दीपावली की पावन रात में सिद्धपीठ रजरप्पा स्थित मां छिन्नमस्तिका मंदिर श्रद्धा और आस्था का केंद्र बना रहा। इस अवसर पर मंदिर के द्वार भक्तों के लिए खुले रहे, जहाँ देर रात तक पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और हवन का दौर चलता रहा।

पश्चिम बंगाल, ओडिशा और बिहार सहित विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु मां छिन्नमस्तिका के दर्शन और पूजन के लिए पहुंचे। मंदिर परिसर को दीपों, रंग-बिरंगी लाइटों, फूलों और गुब्बारों से भव्य रूप में सजाया गया था। पूरे क्षेत्र में भक्ति मंत्रों की गूंज और हवन की अग्नि की ज्योति ने वातावरण को दिव्यता से भर दिया।

मंदिर के पुजारी सुबोध पंडा के अनुसार, “दीपावली की रात मां छिन्नमस्तिका का दरबार भक्तों के लिए खुला रहता है। इस दौरान तंत्र-साधना और सिद्धि प्राप्त करने के लिए साधक बड़ी संख्या में यहां पहुंचते हैं।”

वहीं, पुजारी लोकेश पंडा ने बताया कि कार्तिक अमावस्या का दिन तांत्रिक साधना के लिए विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि इस दिन मां की साधना करने से साधक को सिद्धि और मनोकामना पूर्ति की प्राप्ति होती है। तंत्र-साधना के लिए मंदिर प्रक्षेत्र के तीन स्थान — तांत्रिक घाट, दामोदर-भैरवी नदी संगम स्थल और भंडारीदह — विशेष माने जाते हैं।

श्रद्धालुओं ने बताया कि दीपावली की रात यहां आने से एक अद्भुत शांति का अनुभव होता है। “हर साल इस रात मां की पूजा से मन को सुकून और आशीर्वाद मिलता है,” ।

रजरप्पा का यह सिद्धपीठ तंत्र साधना के लिए प्रसिद्ध है। असम के कामरूप कामाख्या के बाद इसे देश का दूसरा सबसे प्रमुख तांत्रिक स्थल माना जाता है। दीपावली की रात यहां साधना करने की परंपरा सदियों पुरानी है, जब मां छिन्नमस्तिका की आराधना के लिए साधक दूर-दूर से आते हैं।