रामगढ़ (झारखंड) : माँ जगद्धात्री पूजा की 47 वर्ष पुरानी परंपरा – गोला रोड स्थित प्राचीन दुर्गा मंडप में शुरू हुई थी माँ जगद्धात्री की पूजा 

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गोला रोड चट्टी बाजार स्थित प्राचीन दुर्गा मंडप में 1978 से प्रारम्भ हुई थी माँ जगद्धात्री पूजा ।

रामगढ़ (झारखंड) : माँ जगद्धात्री पूजा  गुरुवार 30 अक्टूबर 2025 को श्रद्धा पूर्वक की जाएगी । इसकी तयारी हो चुकी है । रामगढ में माँ जगद्धात्री पूजा आज से ठीक 47 वर्ष पूर्व, 22 नवंबर 1978 को गोला रोड स्थित प्राचीन दुर्गा मंडप में माँ जगद्धात्री की प्रतिमा रख  शुभारंभ की गयी थी । तब से प्राचीन दुर्गा मंडप में मां जगद्धात्री की प्रतिमा स्थापित कर हर वर्ष पूजा की जाती है । परंपरा के अनुसार, अक्षय नवमी के दिन यह पूजा संपन्न होती है, जिसमें एक ही दिन सप्तमी, अष्टमी और नवमी की पूजा की जाती है। इस दिन भगवान विष्णु और आंवला वृक्ष की भी पूजा करने की परंपरा है।

किंवदंती के अनुसार, अक्षय नवमी के दिन देवी माँ ने हस्ती रूपी करिद्रासुर नामक असुर का वध किया था। वहीं, बंगाल के कृष्णनगर राज्य की एक ऐतिहासिक कथा के अनुसार, बंगाल के नबाब सिराजुद्दौला ने कृष्णनगर के राजा कृष्णचंद्र को दुर्गापूजा के समय कैद कर लिया था। बाद में माँ दुर्गा ने स्वप्न में राजा को दर्शन देकर कहा कि रिहा होने के बाद कार्तिक माह की नवमी तिथि को एक ही दिन सप्तमी, अष्टमी और नवमी की पूजा करें। राजा विजया दशमी के दिन मुक्त हुए और अक्षय नवमी को माँ दुर्गा की पूजा जगद्धात्री रूप में आरंभ की।

रामगढ़ के इस प्राचीन दुर्गा मंडप में पूजा की शुरुआत वर्ष 1978 में समिति के संस्थापक सदस्य  स्व. अभिक सामंता, आशुतोष सिंह, जय प्रकाश अग्रवाल, संतोष चक्रवर्ती, ओमप्रकाश गुप्ता, डोमन गुप्ता, अशोक गुप्ता, स्व. ओमप्रकाश अग्रवाल, कृष्ण कुमार अग्रवाल, दीपक सिन्हा, स्व. राजेश्वर सिंह और स्व. निरंजन कुशवाहा, राम पदाराथ सिंह  के सहयोग से की गई थी।

वर्तमान में समिति का संचालन राहुल मजूमदार, विक्रम सिंह, भीमा सिंह, परितोष सिंह, विवेक गोस्वामी, युधिष्ठिर सिंह और सुमित सिंह कर रहे हैं। माँ जगद्धात्री की प्रतिमा का विसर्जन 31 अक्टूबर 2025 को किया जाएगा।