रामगढ़ (झारखंड) : धर्म और अध्यात्म की पावन भूमि रामगढ़ एक बार फिर भक्ति और श्रद्धा के सागर में अवगाहन कर रही है। शिवाजी रोड स्थित श्री बांके बिहारी राधा रानी किला मंदिर के प्रांगण में सोमवार से 62वें सतचंडी एवं श्रीरामचरितमानस नवाह्परायण महायज्ञ का शुभारंभ मंगल ध्वनि, वेद मंत्रों और श्रीगणेश पूजन के साथ हुआ।
यह संयुक्त महायज्ञ किला मंदिर प्रबंध समिति के तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। सन 1963 में आरंभ हुई यह परंपरा आज भी पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ जारी है।
महायज्ञ के आचार्य मंदिर के प्रधान पुजारी, वैदिक कर्मकांडी सह ज्योतिषाचार्य पंडित गोविंद बल्लभ शर्मा शास्त्री हैं, जबकि यजमान की भूमिका आशीष अग्रवाल एवं उनकी धर्मपत्नी निभा रहे हैं। ब्रह्मा के रूप में पंडित मुरारी मोहन शर्मा प्रतिष्ठित हैं।
दस विद्वान ब्राह्मण—पंडित रविंद्र पांडेय (मानस व्यास), राजकिशोर पाठक, रासबिहारी पांडेय, राजू पाठक, संजय पाठक, चंदन पाठक, राजन पांडेय, ब्रजेश पाठक और सत्येंद्र दूबे—सतचंडी पाठ और श्रीरामचरितमानस नवाह्परायण के अखंड पाठ का संचालन कर रहे हैं।
मंदिर परिसर घंटा-घड़ियालों की मधुर ध्वनि, वेद-मंत्रों की गूंज और भक्तिमय वातावरण से आस्था की आभा में नहाया हुआ है। प्रतिदिन श्रीगणेश पूजन, सर्ववेदी पूजन, सतचंडी पाठ और अपराह्न में श्रीरामचरितमानस नवाह्परायण का आयोजन किया जा रहा है।
आचार्य पंडित गोविंद बल्लभ शर्मा शास्त्री ने कहा कि “यह महायज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज को सदाचार, सद्भाव और आध्यात्मिकता के मार्ग पर अग्रसर करने का माध्यम है।”
आकर्षक रूप से सजे किला मंदिर परिसर में श्रद्धालु यज्ञमंडप की परिक्रमा कर पुण्य लाभ प्राप्त कर रहे हैं। यह नवदिवसीय महायज्ञ 5 नवंबर को अटूट भंडारे के साथ पूर्णाहुति प्राप्त करेगा। किला मंदिर की यह परंपरा न केवल रामगढ़ की आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि सच्चा यज्ञ वह है, जिसमें मानवता और श्रद्धा साथ चलें।