रामगढ़, झारखंड : शांतिधारा फ़ाउन्डेशन के सौजन्य से झंडा चौक स्थित फ़ाउन्डेशन के कार्यालय में भगवान बिरसा मुंडा की 159वीं जयंती के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत भगवान बिरसा मुंडा के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर भावपूर्ण श्रद्धांजलि देने के साथ हुई।
फ़ाउन्डेशन के संस्थापक एवं अध्यक्ष सुरेश पी. अग्रवाल ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा ने जल, जंगल और ज़मीन सहित आदिवासी संस्कृति एवं अस्मिता की रक्षा के लिए आजीवन संघर्ष किया। उन्होंने बताया कि बिरसा मुंडा ने बिरसाईत पंथ के माध्यम से सात्विकता और स्वच्छता को बढ़ावा दिया और ब्रिटिश शासन एवं ईसाई मिशनरियों द्वारा कराए जा रहे धर्म परिवर्तन के विरोध में उलगुलान का शंखनाद किया।
कार्यकारी अध्यक्ष गोविंद लाल अग्रवाल ने कहा कि बिरसा मुंडा को धरती आबा के नाम से जाना जाता है। उन्होंने ज़मींदारी प्रथा के खिलाफ संघर्ष किया और आदिवासियों की भूमि की रक्षा हेतु कई क़ानून बनवाए। आज उनके नाम पर अनेक संस्थान और कल्याणकारी योजनाएँ संचालित हो रही हैं।
वरिष्ठ उपाध्यक्ष डी.पी. सिंह ने कहा कि बिरसा मुंडा सदैव अंग्रेजों के दमनकारी शासन के विरुद्ध संघर्षरत रहे, लेकिन उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर वह सम्मान लंबे समय तक नहीं मिल पाया जिसके वे हकदार थे। पिछले कुछ वर्षों में केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा उनके योगदान को सम्मानित करने की सराहनीय पहल की गई है।
वरिष्ठ सदस्य माणिक चंद जैन ने कहा कि बिरसा मुंडा एक क्रांतिकारी नेता थे जिन्होंने आदिवासी समुदाय ही नहीं बल्कि समाज के सभी वर्गों के हित में कार्य किया। अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन के चलते उन्हें जेल जाना पड़ा जहां संदिग्ध परिस्थितियों में उनकी मृत्यु हुई।
कार्यक्रम में झारखंड स्थापना दिवस के रजत जयंती वर्ष को लेकर भी प्रसन्नता व्यक्त की गई। वक्ताओं ने कहा कि राज्य में शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में निरंतर प्रगति हो रही है।
इस अवसर पर पदम चंद जैन तथा कर अधिवक्ता विवेक अग्रवाल भी उपस्थित रहे।