पटना (बिहार) : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही यह संदेश साफ कर दिया कि नई एनडीए सरकार जातीय संतुलन को प्राथमिकता में रखकर आगे बढ़ेगी। गुरुवार को राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में मुख्यमंत्री, दोनों उपमुख्यमंत्रियों और 26 मंत्रियों को शपथ दिलाई। इस टीम में लगभग हर प्रमुख सामाजिक वर्ग को प्रतिनिधित्व दिया गया है।
कैबिनेट में जातीय प्रतिनिधित्व का समीकरण
नीतीश सरकार ने सत्ता समीकरण को संतुलित रखने के लिए इस बार सवर्ण, ओबीसी, दलित, महादलित, वैश्य, यादव, निषाद व अल्पसंख्यक समुदायों को समुचित स्थान दिया है। खास बात यह है कि मंत्रिमंडल में राजपूत और कुर्मी–कुशवाहा समुदाय की हिस्सेदारी उल्लेखनीय रूप से मजबूत दिखती है।
कुल शपथ लेने वाले मंत्री: 26
कौन से समुदाय से कितने मंत्री?
राजपूत समुदाय – 4 मंत्री
श्रेयसी सिंह (जमुई)
संजय कुमार सिंह (महुआ)
संजय सिंह टाइगर (आरा)
लेसी सिंह (धमदाहा)
विधानसभा चुनाव में इस बार राजपूत समाज के 32 विधायक विजेता बने, जिनमें अधिकतर एनडीए के टिकट पर थे।
दलित समुदाय – 4 मंत्री
सुनील कुमार (भोरे)
अशोक चौधरी (एमएलसी)
लखेंद्र रौशन
संजय पासवान (बखरी)
महादलित समुदाय – 1 मंत्री
संतोष कुमार सुमन (मुसहर समुदाय), पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी के पुत्र
कुर्मी–कुशवाहा समुदाय – 5 मंत्री
नीतीश कुमार (मुख्यमंत्री, कुर्मी)
सम्राट चौधरी
सुरेंद्र मेहता
दीपक प्रकाश
श्रवण कुमार
इस वर्ग की भूमिका हमेशा से बिहार की राजनीति में निर्णायक रही है, जिसका प्रभाव नए मंत्रिमंडल में स्पष्ट झलकता है।
वैश्य समुदाय – 4 मंत्री
दिलीप जायसवाल
नारायण प्रसाद
प्रमोद कुमार
अरुण शंकर प्रसाद (सूढ़ी समाज)
भूमिहार समुदाय– 2 मंत्री
विजय कुमार चौधरी (भूमिहार)
विजय कुमार सिन्हा (भूमिहार)
ब्राह्मण – 1 मंत्री
मंगल पांडे
कायस्थ – 1 मंत्री
नितिन नवीन (लगातार दूसरी बार मंत्री बने)
निषाद/मल्लाह समुदाय – 2 मंत्री
मदन सहनी
रमा निषाद
यादव समुदाय – 2 मंत्री
रामकृपाल यादव
विजेंद्र यादव
मुस्लिम समुदाय – 1 मंत्री
जमा खान (चैनपुर, जदयू)
बिहार कैबिनेट में जातीय संतुलन की रणनीति
एनडीए की नई रणनीति साफ तौर पर दिखाती है कि सरकार ने सामाजिक समीकरणों को साधने के लिए व्यापक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया है। बड़े सामाजिक समूहों के साथ-साथ अल्पसंख्यक और महिलाओं को भी टीम में सम्मानजनक स्थान दिया गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह संतुलित कैबिनेट आने वाले वर्षों में नीतीश सरकार की स्थिरता को मजबूत करेगा।