हरिनाम में डूबी शाम, गीता उपदेशों ने भक्त-हृदय को किया आनंदित

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रामगढ़, झारखंड : शिवाजी रोड स्थित प्रसिद्ध बांके बिहारी राधा रानी किला मंदिर का प्रांगण रविवार की संध्या भक्ति, उल्लास और दिव्यता से सराबोर हो उठा। मंदिर परिसर में हरिनाम संकीर्तन का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें जयपुर, राजस्थान के हरिकृष्णा केंद्र से पधारे राघव पंडित दास मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित हुए।

उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को सरल और हृदयस्पर्शी शैली में समझाते हुए कहा कि गीता मानव जीवन के हर मोड़ पर सही मार्ग दिखाने वाली प्रकाशपुंज है। राघव पंडित दास ने समझाया कि श्रीकृष्ण का उपदेश—कर्म करो, फल की चिंता मत करो—जीवन का सबसे बड़ा सत्य है, जो मनुष्य को भय, मोह और भ्रम से मुक्त कर कर्मयोग की ओर प्रेरित करता है।

उन्होंने आगे बताया कि हर परिस्थिति में समभाव रखना ही सच्चे भक्त का लक्षण है। जब मनुष्य अपने भीतर बसे परमात्मा को पहचान लेता है, तब जीवन स्वतः ही सरल, शांत और आनंदमय हो जाता है।

आयोजन के दौरान हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे… हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे महामंत्र की गूंज से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठा। संकीर्तन की ऐसी छटा बिखरी कि श्रोता स्वयं को रोक नहीं पाए और बांके बिहारी-राधा रानी की भक्ति में झूमते-नृत्य करते रहे।भक्ति, ज्ञान और संगीत से सजी यह दिव्य संध्या उपस्थित हर व्यक्ति के मन को आनंद और शांति से भर गई।

कार्यक्रम में प्रो. संजय प्रसाद सिंह, प्रदीप कुमार सिंह, मदन पाठक, विद्या पाठक, अभिषेक पाठक, अतूल पाठक, पंडित गोविंद बल्लभ शर्मा, मुरारी शर्मा, रूपा, पूजा, पुष्पा, कविता, पूनम, आरती, अर्चना सहित भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।