बॉडीगार्ड सिपाही की दबंगई बनी सवाल, जांच के घेरे में पुलिसिया अनुशासन, थाना प्रभारी को होना पड़ा निलंबित

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रांची, झारखंड : झारखंड पुलिस में अनुशासन और कानून के पालन को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामला राजधानी रांची का है, जहां एक न्यायाधीश के बॉडीगार्ड सिपाही पर कानून को ठेंगा दिखाने, अधिकारियों को धमकाने और चेकिंग अभियान में बाधा डालने के गंभीर आरोप सामने आए हैं।

जानकारी के अनुसार, संबंधित सिपाही बिना नंबर प्लेट की स्कूटी से घूम रहा था। एंटी क्राइम चेकिंग अभियान के दौरान जब उसे रोका गया, तो उसने नियमों का पालन करने के बजाय विवाद खड़ा कर दिया। सिपाही कोतवाली थाना प्रभारी समेत अन्य अधिकारीयों से उलझ गया । आरोप है कि सिपाही ने अपने “साहब” का रौब दिखाते हुए मौके पर मौजूद अधिकारियों को डराने और धमकाने की कोशिश की।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, चेकिंग के दौरान पास में खड़ी कार में सवार महिलाओं पर अभद्र टिप्पणी करने का भी आरोप लगाया गया है। इतना ही नहीं, पुलिस की कार्रवाई के बीच खुद पुलिसकर्मी द्वारा बाधा उत्पन्न करना, विभागीय मर्यादा और कानून व्यवस्था पर बड़ा सवाल बन गया है।

इस मामले में  वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रांची ने कोतवाली थाना प्रभारी आदिकांत महतो को लाइन हाजिर कर दिया है और पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दिए हैं। जांच पूरी होने तक उन्हें पुलिस केंद्र, रांची में योगदान देने का निर्देश दिया गया है। यह निलंबन पुलिसिया हलके में चर्चा में है ।

गौर करने वाली बात यह है कि दो दिन पूर्व ही मुख्यमंत्री ने राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था, कानून-व्यवस्था और पुलिस की जिम्मेदारी को लेकर अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए थे। ऐसे में एक सिपाही द्वारा नियमों की खुलेआम अनदेखी करना और वरिष्ठ अधिकारियों पर धौंस जमाना, सीएम के निर्देशों की अवहेलना के तौर पर भी देखा जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर बिना नंबर प्लेट की स्कूटी में ऐसा क्या था, जिसे चेक नहीं करने देने के लिए इतना हंगामा किया गया। फिलहाल पूरे मामले की विभागीय जांच जारी है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।