रामगढ, झारखंड : नागरी लिपि परिषद, मॉरीशस और झारखंड इकाई, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास महिला कार्य,झारखंड, रामगढ़ महिला साहित्य मंच और बुलंदी मॉरीशस के संयुक्त तत्वावधान में डॉक्टर सुब्रमण्यम भारती की जन्म जयंती के अवसर पर भारतीय भाषा दिवस का आयोजन संयुक्त रूप से आभासी मंच पर किया गया।
अध्यक्ष डॉ हरि सिंह पाल, सान्निध्य प्रो. (डॉ.) सविता सिंह सेंगर, कुलाधिपति, झारखंड राय विश्वविद्यालय, झारखंड एवं मुख्य अतिथि डॉ राजलक्ष्मी कृष्णन, चेन्नई थीं। स्वागत भाषण डॉक्टर श्रीदेवी दुरई ने किया तथा देश-विदेश से वक्ताओं ने डॉ. भारती के अमूल्य योगदान को याद किया।
मुख्य वक्ता डॉ. राजशेखर, आईजीसीसीआई. के अध्यक्ष, मॉरीशस, ने कहा कि डॉ. भारती ने देश के एकता और अखंडता के लिए मातृभाषा के महत्व को समझा और उन्होंने पूरे देश के लिए एक संपर्क भाषा पर जोर दिया। भारत में भाषाए़ अनेक हैं किंतु संस्कृति एक है।
पूर्व प्रशासनिक अधिकारी मध्य प्रदेश डॉक्टर अशोक कुमार भार्गव ने कहा कि डॉक्टर भारती न केवल महान चिंतक और लेखक थे और उनके एक स्वतंत्रता सेनानी थे उन्होंने दक्षिण और उत्तर भारत को भाषाई धरातल पर जोड़ने का काम किया। वह महिला स्वतंत्रता की बात किया करते थे। जो आज अत्यंत प्रासंगिक है। इस कार्यक्रम की विशेषता यह रही की इसमें मॉरीशस, नीदरलैंड्स, भारतवर्ष के विभिन्न प्रांतो के वक्ताओं ने भाग लिया तथा डॉ. सी.जे. प्रसन्ना ने मलयालम में, डॉ. राजलक्ष्मी कृष्ण ने तमिल में, डॉ. सलोनी, मॉरीशस ने तमिल में, डॉ शारदा प्रसाद ने बंगला और सादरी में, डॉ विवेक बादल कुमाऊ़नी में अपनी बातें रखीं।
नागरी लिपि परिषद के महामंत्री और सभा के अध्यक्ष डॉ. हरिसिंह पाल ने डॉक्टर भारती पर लिखे गए अपने 26 वर्ष पुराने आलेख के कुछ अंश पढ़ कर सुनाए। डॉ. भारती 17 भाषाएं जानते थे और उनका व्यक्तित्व बहु आयामी था। वे दूरद्रष्टा कवि, चिंतक और स्वतंत्रता सेनानी थे।
कार्यक्रम का संयोजन व सुंदर, कुशल संचालन नागरी लिपि परिषद, मॉरीशस इकाई के अध्यक्ष डॉ. सोमदत्त काशीनाथ ने किया. उन्होंने अपनी कविता के माध्यम से डॉ. भारती को श्रद्धांजलि अर्पित की। डॉ रामा तक्षक, नीदरलैंड्स और नागरी लिपि परिषद, झारखंड इकाई के प्रांत संयोजक डॉ. अशोक अभिषेक ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम में रेनू चमन, मॉरीशस, डॉ. मुक्ता कौशिक, छत्तीसगढ़, रतिराम गढ़वाल, झारेंद्र कुमार, मनोज झा, जितेंद्र कुमार, श्री महेंद्र सिंह, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के प्रांत संयोजक, मो. इशहाक खान, डॉ. स्वाति पांडेय, डॉ. हेमा जोशी, मंजू पांचाल, मोहन द्विवेदी, डॉ. रश्मि, डा. अनुज, डॉ. रजनी गुप्ता सहित अनेक वक्ताओं ने अपने-अपने विचार रखे।धन्यवाद ज्ञापन शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, महिला कार्य की प्रांत संयोजक और रामगढ़ महाविद्यालय की पूर्व प्राचार्या डॉ. शारदा प्रसाद ने किया।