रांची, झारखंड : झारखंड हाईकोर्ट ने राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज ( रिम्स ) की सरकारी ज़मीन पर कथित अतिक्रमण मामले में सख्त रुख़ अपनाया है। न्यायालय ने एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी ) से मामले की जांच कराने का आदेश दिया है। साथ ही उच्च न्यायालय ने यह भी कहा है कि जांच के दौरान दोषी अधिकारियों, संस्थाओं और संबंधित बिल्डरों की पहचान की जाए और जालसाज़ी के शिकार हुए लोगों को हुए नुकसान की भरपाई सुनिश्चित की जाए।
न्यायालय की अदालत में यह मामला गंभीरता से देखा गया और हाईकोर्ट ने रिम्स से जुड़े अनुचित भूमि हस्तांतरण, अतिक्रमण और संबंधित दस्तावेजों की समीक्षा का भी निर्देश दिया। न्यायालय ने सुनवाई के लिए अगली तारीख 6 जनवरी 2026 निर्धारित की है।
मुख्य बिंदु :
उच्च न्यायालय ने एसीबीको समग्र जांच सौंपी है, जिसमें अतिक्रमण, भूमि के अवैध उपयोग और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच शामिल है।
न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि जिन लोगों ने जमीन के संबंध में धोखाधड़ी का शिकार होकर भुगतान या अन्य आर्थिक नुक़सान उठाया है, उनकी उचित भरपाई और राहत सुनिश्चित की जाएगी।
कोर्ट ने रिम्स प्रशासन से भी विस्तृत रिपोर्ट तलब की है, जिसमें भूमि के रिकॉर्ड, स्वीकृत नक्शे, पट्टे और संबंधित लेनदेन का पूरा विवरण होना आवश्यक है।
अगली कोर्ट मार्मिक सुनवाई 6 जनवरी 2026 को होगी, जिसमें जांच की प्रगति, एसीबी की प्रारंभिक रिपोर्ट और भरपाई योजना का विस्तृत ब्यौरा पेश करने को कहा गया है।
मामले को लेकर रांची के सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने भी कोर्ट के निर्देश का स्वागत किया है। उनका कहना है कि रिम्स जैसी प्रतिष्ठित सरकारी स्वास्थ्य संस्था की जमीन के साथ किए गए संभावित अनुचित कार्यों की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई अपेक्षित है।