रामगढ़, झारखंड : जिले में इन दिनों यह चर्चा जोरों पर है कि झारखंड विधानसभा की प्रदूषण समिति के हालिया दौरे के नाम पर ईंट-भट्ठा मालिकों से पैसे की मांग की गई। बताया जा रहा है कि दो दिवसीय जिला दौरा पूरा कर समिति लौट चुकी है, लेकिन इसके बाद भी कुछ लोगों द्वारा ईंट-भट्ठों से समिति के नाम पर 20 हजार रुपये तक की मांग की जा रही है। जिन ईंट-भट्ठा मालिकों ने पैसे नहीं दिए, उन पर कथित तौर पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार अवैध कोयला खपत के मामलों से जुड़े कुछ प्रभावशाली लोग भट्ठा संचालकों से पैसे वसूल कर “विभाग तक पहुंचाने” की बात कह रहे हैं। वहीं जिला प्रशासनिक स्तर के अधिकारियों ने ऐसे किसी भी प्रकार की वसूली के निर्देश से स्पष्ट इंकार किया है।
इसी विवाद के बीच “पिछले सीजन” का मुद्दा भी उछल रहा है, जिसमें कथित रूप से “जिला के आला अधिकारियों” के नाम पर “सलामी राशि” वसूले जाने की बात सामने आई थी। इस बार भी ऐसी बात कही जा रही है कि राशि बढ़ाने का “ऊपरी आदेश” है, हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
कुछ भट्ठा संचालकों का कहना है कि जब तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं होती, वे किसी भी नाम पर राशि देने के पक्ष में नहीं हैं। इस बीच क्षेत्रीय स्तर पर तैनात अधिकारियों के नाम पर भी वसूली किए जाने की बात सामने आई है।
“ईंट-भट्ठों की कड़ी निगरानी जरूरी” : धनंजय कुमार पुटूस
सांसद प्रतिनिधि धनंजय कुमार पुटूस ने मामले पर कहा कि प्रदूषण समिति के नाम पर पैसे की मांग बेहद गलत है और यह बढ़ते भ्रष्टाचार की तस्वीर पेश करता है। उन्होंने कहा कि जिले के कई ईंट-भट्ठे अवैध कोयले पर निर्भर हैं, जिस पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए और जिले में कड़ी निगरानी अनिवार्य है।