रामगढ़, झारखंड : ओशो फ्रेगरेंस ध्यान शिविर के तृतीय दिवस की शुरुआत तथाता भाव से हुई। स्वामी ओशो प्रदीप जी ने जीवन में प्रतिकूलता एवं अनुकूलता को समान रूप से स्वीकार करने का संदेश देते हुए बताया कि कई बार जीवन की कठिन परिस्थितियां भी हमारे आध्यात्मिक विकास में सहायक बनती हैं। इस दौरान साधकों ने अपने अनुभव साझा किए और प्रश्नोत्तर सत्र के माध्यम से जीवन से जुड़े कई प्रश्नों के उत्तर पाए। डायनेमिक मेडिटेशन के साथ साधकों ने ऊर्जा जागरण किया और गहन शांति एवं समाधि का अनुभव प्राप्त किया।
द्वितीय सत्र
द्वितीय सत्र में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में रामगढ़ सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए पत्रकार एवं मीडिया प्रतिनिधियों ने योग, ध्यान, सोशल मीडिया के प्रभाव, नशामुक्ति, पारिवारिक संबंधों और आधुनिक जीवन व्यवस्था में ध्यान की उपयोगिता से जुड़े सवाल पूछे। बाबा ने बताया कि ध्यान के माध्यम से नशामुक्ति, मानसिक शांति, एकाग्रता और पारिवारिक संबंधों में सुधार संभव है। उन्होंने कहा कि पूजा और प्रार्थना में इच्छा रहती है, जबकि ध्यान में केवल प्रभु से मिलन का भाव होता है। इसके बाद विपश्यना ध्यान का सत्र आयोजित किया गया, जिसमें सांसों के माध्यम से मन को शांति से जोड़ने की विधि सिखाई गई।
तृतीय एवं अंतिम सत्र
अंतिम सत्र में ओशो अनुज स्वामी शैलेंद्र सरस्वती द्वारा माला दीक्षा दी गई। सैकड़ों साधकों ने माला धारण कर आशीर्वाद प्राप्त किया और आध्यात्मिक मार्ग पर सजग रहने का संकल्प लिया। मंच संचालन स्वामी मनोज कुमार, मां दीपा वर्मा और कमल बगड़िया ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम में बाहर से आए साधकों के साथ बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी शामिल हुए। अंत में सम्मान समारोह आयोजित किया गया, जिसमें कई सदस्यों को सम्मान पत्र प्रदान किया गया। कार्यक्रम का समापन उत्सव, गीत, आशीर्वाद और प्रसाद वितरण के साथ हुआ।