रामगढ कैंट, झारखण्ड : पिछले वर्ष के सितंबर माह में केंद्र सरकार द्वारा वस्तु एवं सेवा कर में कमी लाने से वाहन बाजार की माँग आई तेज़ी से झारखंड में ऑटोमोबाइल वाहनों की खुदरा बिक्री में शानदार बढ़ोतरी दर्ज की , जिसने वाहन बिक्री को नई उचाई दी । फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) झारखंड के अनुसार, दिसंबर 25 में वाहनों की कुल खुदरा बिक्री 46207 इकाइयों रही जो पिछले वर्ष दिसंबर में दर्ज 38546 इकाइयों की तुलना में 19.87% की वृद्धि है ।यदि कैलेंडर वर्ष 2025 की तुलना कैलेंडर वर्ष 2024 से करे तो हम पाते है की वर्ष 2025 में 17.16% की वृद्धि के साथ 678091 इकाई की विक्री हुई जबकि वर्ष 2024 में यह बिक्री 578796 इकाई की हुई थी । हम यदि पूरे भारत के कैलेंडर वर्ष के आकड़े पर गौर करे तो पाते है की कैलेंडर वर्ष 2025 में मात्र 7.71% की वृद्धि के साथ 2,81,61,228 इकाई वाहनो की बिक्री हुई जबकि 2024 में यह संख्या 2,61,45,445 थी ।
फाडा झारखड़ चेप्टर के चेयरपर्सन गोविंद पी मेवाड़ ने पत्रकारों को जानकारी देते हुए बताया की झारखंड स्तर पर दो पहिया वाहन ने 16.92% की वृद्धि के साथ दिसम्बर 25 में 33586 इकाई की विक्री की वही दिसंबर 24 में इसकी इकाई 28726 थी ।तीन पहिया वाहन ने दिसंबर 25 में 3351 इकाई के साथ 39.45 % की बढ़त बनाई जबकि दिसंबर 24 में 2403 इकाई की ही बिक्री दर्ज की थी | कमर्शियल वाहन ने दिसम्बर 25 में 4.80% की वृद्धि के साथ 1682 इकाई बिक्री दर्ज की है वही दिसंबर में यह 1605 इकाई थी ।यात्री वाहन ने झारखंड में दिसंबर 25 में 27.43 % की बढ़त बनाते हुए 5593 इकाई की बिक्री दर्ज की है वहीं दिसंबर 24 में यह 4389 इकाई थी। दिसंबर 25 मे टैक्टर ने 48.82 % की वृद्धि में उछाल के साथ 1890 इकाई की बिक्री दर्ज की है जबकि पिछले साल अक्टूबर 24 में ट्रैक्टर ने मात्र 1270 इकाई की बिक्री ही दर्ज की थी | खराब मौसम के कारण निर्माण उपकरणों की बिक्री में 31.37 % गिरावट दर्ज कर दिसंबर25 में मात्र 105 इकाई की विक्री दर्ज की जबकि पिछले वर्ष दिसम्बर में इसकी विक्री 153 इकाई हुई थी ।
गौर तलब है की वाहनो की विक्री में जीएसटी छूट के साथ साथ ग्रामीण क्षेत्र में बढ़ती अर्थ व्यवस्था का महत्पूर्ण योगदान रहा है यह भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए एक सकारात्मक संकेत है।” जीएसटी छूट के बावजूद सरकार के राजस्व में बढ़ोतरी हुई ।दिसंबर 25 में यह 6.1% की वृद्धि के साथ 1.74 लाख करोड़ हो गई जबकि दिसंबर 24 में यह 1.64 लाख करोड़ ही थी । “यह स्पष्ट है कि केंद्र सरकार द्वारा लिए गए निर्णयों का सीधा लाभ न केवल उपभोक्ताओं को मिला है, बल्कि इससे सरकार के राजस्व और देश के व्यवसायिक परिदृश्य में भी अप्रत्याशित वृद्धि हुई है।