रामगढ़, झारखंड :रामगढ़ जिला पुलिस ने साइबर अपराध के एक बड़े मामले का खुलासा करते हुए 46 लाख 23 हजार 901 रुपये की अवैध साइबर ठगी का भंडाफोड़ किया है। इस संबंध में जानकारी आयोजित पत्रकार सम्मेलन में दी गई।
पुलिस के अनुसार 20 जनवरी 2026 को रूबी खातून (38 वर्ष), पति मो. इसराफिल अंसारी, निवासी जमुआ, थाना मांडू (कुज्जू), जिला रामगढ़, झारखंड ने साइबर अपराध थाना, रामगढ़ में आवेदन दिया था। पीड़िता ने आरोप लगाया कि उसके तथा उसकी तीन गोतनियों के नाम से इंडियन ओवरसीज बैंक, मरार शाखा, रामगढ़ में खाते खुलवाए गए और सभी के नाम पर जियो कंपनी के सिम लिए गए। बाद में अबु तालिब, सरफराज उर्फ सोनु एवं अन्य लोगों ने गिरोह बनाकर धोखे से बैंक खाते और सिम अपने कब्जे में लेकर उनका दुरुपयोग किया।
मामले को गंभीरता से लेते हुए साइबर अपराध थाना, रामगढ़ में कांड संख्या 03/26 दिनांक 20.01.2026 दर्ज किया गया। यह कांड आईटी एक्ट की धारा 66(C)/66(D) एवं भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज किया गया।
पुलिस अधीक्षक अजय कुमार (भा.पु.से.) के निर्देश पर पुलिस उपाधीक्षक सह थाना प्रभारी साइबर अपराध थाना, रामगढ़ चंदन कुमार वत्स के नेतृत्व में विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया। तकनीकी अनुसंधान के आधार पर नामजद अभियुक्तों को पूछताछ के लिए साइबर थाना लाया गया, जहां पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद अबु तालिब एवं सरफराज उर्फ सोनु को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
अग्रतर जांच में बैंक पासबुक की जांच संबंधित बैंक से कराई गई, जिसमें खुलासा हुआ कि पीड़िताओं के बैंक खातों का उपयोग असम और कर्नाटक राज्यों सहित विभिन्न स्थानों पर बेटिंग ऐप के माध्यम से साइबर ठगी के लिए किया गया। कुल 46,23,901 रुपये का अवैध लेन-देन सामने आया है।
गिरफ्तार आरोपी :
अबु तालिब (29 वर्ष), पिता मो. कलाम उर्फ अब्बु कलाम, निवासी जरियों, थाना रजरप्पा, जिला रामगढ़, झारखंड
मो. सरफराज उर्फ सोनु (27 वर्ष), पिता मो. रियासत, निवासी नईसराय बस्ती, थाना एवं जिला रामगढ़, झारखंड
बरामदगी :
बैंक पासबुक – 02
मोबाइल फोन – 02
छापामारी दल में शामिल पुलिसकर्मी :
चंदन कुमार वत्स, दिगम्बर पाण्डेय, रंजीत कुमार यादव, विकास आर्यन, जितेंद्र कुमार पासवान, मो. तौफिक सहित तकनीकी शाखा, रामगढ़ के पुलिस पदाधिकारी एवं कर्मी शामिल थे।
पुलिस ने बताया कि मामले में अन्य संलिप्त आरोपियों की तलाश जारी है और साइबर गिरोह के नेटवर्क की विस्तृत जांच की जा रही है।